भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1393, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1393

नवम मंडल सूक्त—१ देवता—पवमान सोम स्वादिष्ठया मदिष्ठया पवस्व सोम धारया. इन्द्राय पातवे सुतः.. (१) हे सोम! इंद्र के पीने के लिए तुम्हें निचोड़ा गया है. तुम अतिशय मादक और मादक धारा से निचुड़ो. (१) रक्षोहा विश्वचर्षणिरभि योनिमयोहतम्. द्रुणा सधस्थमासदत्.. (२) राक्षसों के हंता और सबके दर्शक सोम स्वर्ण द्वारा चोट खाकर एवं द्रोणकलश में स्थित होकर यज्ञवेदी पर बैठते हैं. (२) वरिवोधातमो भव मंहिष्ठो वृत्रहन्तमः. पर्षि राधो मघोनाम्.. (३) हे सोम! तुम धनों के अतिशय दाता, दाताओं में श्रेष्ठ एवं शत्रुओं का सर्वदा वध करने वाले बनो. तुम धनी शत्रुओं का धन हमें दो. (३) अभ्यर्ष महां देवानां वीतिमन्धसा. अभि वाजमुत श्रवः.. (४) हे सोम! तुम अन्न लेकर महान् देवों के यज्ञ के समीप आओ. तुम हमें बल और अन्न दो. (४) त्वामच्छा चरामसि तदिदर्थं दिवेदिवे. इन्दो त्वे न आशसः.. (५) हे सोम! हम प्रतिदिन तुम्हारी भली प्रकार सेवा करते हैं. हमारा यही काम है. हमारी आशा तुम्हारे अतिरिक्त दूसरी जगह नहीं है. (५) पुनाति ते परिस्रुतं सोमं सूर्यस्य दुहिता. वारेण शश्वता तना.. (६) हे सोम! सूर्य की पुत्री श्रद्धा तुम्हारे निचुड़े हुए रस को विस्तृत तथा नित्य दशापवित्र से शुद्ध करती है. (६) तमीमण्वीः समर्य आ गृभ्णन्ति योषणो दश. स्वसारः पार्ये दिवि.. (७)