ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1401, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहैं, उस समय शक्तिशाली इंद्र यज्ञ में आना चाहते हैं। (४) पवमानो अभि स्पृधो विशो राजेव सीदति. यदीमृण्वन्ति वेधसः.. (५) जिस समय काम करने वाले लोग इस सोम को प्रेरित करते हैं, उस समय पवमान सोम यज्ञ में विघ्न डालने वाले लोगों की ओर राजा के समान जाते हैं. (५) अव्यो वारे परि प्रियो हरिर्वनेषु सीदति. रेभो वनुष्यते मती.. (६) हरे रंग वाले एवं देवों के प्रिय सोम जलों में मिलकर मेष की बालों वाली खाल पर बैठते हैं एवं शब्द करते हुए स्तुतियां सुनते हैं. (६) स वायुमिन्द्रमश्विना साकं मदेन गच्छति. रणा यो अस्य धर्मभिः.. (७) जो सोमरस निचोड़ने के कार्य में प्रसन्न होता है, वह प्रसन्नतापूर्वक वायु, इंद्र एवं अश्विनीकुमारों को प्राप्त करता है. (७) आ मित्रावरुणा भगं मध्वः पवन्त ऊर्मयः. विदाना अस्य शक्मभिः.. (८) जिन यजमानों के सोमरस की लहरें मित्र, वरुण एवं भगदेव की ओर गिरती हैं, वे सोम को जानते हुए सुखों से मिलते हैं. (८) अस्मभ्यं रोदसी रयिं मध्वो वाजस्य सातये. श्रवो वसूनि सं जितम्.. (९) हे द्यावा-पृथिवी! तुम नशीले सोमरस को पाने के लिए हमें अन्न, धन एवं पशु दो. (९) सूक्त—८ देवता—पवमान सोम एते सोमा अभि प्रियमिन्द्रस्य काममक्षरन्. वर्धन्तो अस्य वीर्यम्.. (१) यह सोम इंद्र का बल बढ़ाते हुए इंद्र के अभिलषित एवं प्रिय सोम को बरसावें. (१) पुनानासश्चमूर्षदो गच्छन्तो वायुमश्विना. ते नो धान्तु सुवीर्यम्.. (२) प्रसिद्ध सोम निचुड़ते हैं, चमस में स्थित होते हैं एवं वायु को प्राप्त होते हैं. वायु हमें शोभन शक्ति दें. (२) इन्द्रस्य सोम राधसे पुनानो हार्दि चोदय. ऋतस्य योनिमासदम्.. (३) हे सोम! तुम निचुड़ते हुए एवं अभिलषित बनकर इंद्र को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ के प्रमुख स्थान पर बैठो एवं इंद्र को प्रेरित करो. (३) ebook converter DEMO Watermarks*