भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1408, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1408

अपघ्नन्तो अराव्णः पवमानाः स्वर्द्दशः. योनावृतस्य सीदत.. (९) हे अदाताओं को मारने वाले एवं सब स्थान से देखने वाले सोम! तुम यज्ञशाला में बैठो. (९) सूक्त—१४ देवता—सोम परि प्रासिष्यदत्कविः सिन्धोरूर्मावधि श्रितः. कारं बिभ्रत् पुरुस्पृहम्.. (१) मेधावी एवं नदी की तरंगों में आश्रित सोम बहुतों द्वारा बहने योग्य शब्द करते हुए बहते हैं. (१) गिरा यदी सबन्धवः पञ्च व्राता अपस्यवः. परिष्कृण्वन्ति धर्णसिम्.. (२) परस्पर बंधुता का भाव रखने वाले, पांच जातियों वाले एवं यज्ञकर्म के इच्छुक लोग सोम को धारक वचनों द्वारा अलंकृत करते हैं. (२) आदस्य शुष्मिणो रसे विश्वे देवा अमत्सत. यदी गोभिर्वसायते.. (३) जब सोमरस को गाय के दूध में मिलाया जाता है, तब सभी देव शक्तिशाली सोम के नशे में मुदित होते हैं. (३) निरिणानो वि धावति जहच्छर्याणि तान्वा. अत्रा सं जिघ्नते युजा.. (४) भेड़ के बालों से बने दशापवित्र से निकलकर सोम नीचे टपकता है एवं इस यज्ञ में अपने मित्र इंद्र से मिलता है. (४) नप्तीर्भियों विवस्वतः शुभ्रो न मामृजे युवा. गाः कृण्वानो न निर्णिजम्.. (५) सोम यजमान की उंगलियों द्वारा इस प्रकार मसले जाते हैं, जिस प्रकार दीप्त अश्व की मालिश की जाती है. (५) अति श्रिती तिरश्चता गव्या जिगात्यण्व्या. वग्नुमियर्ति यं विदे.. (६) उंगलियों द्वारा निचोड़े जाते हुए सोम गाय के दूध-दही में मिलने के लिए तिरछे चलते हैं एवं शब्द करते हैं. (६) अभि क्षिपः समग्मत मर्जयन्तीरिषस्पतिम्. पृष्ठा गृभ्णत वाजिनः.. (७) मसलती हुई उंगलियां अन्नों के स्वामी सोम से मिलती हैं एवं शक्तिशाली सोम की पीठ पर चढ़ती हैं. (७) ebook converter DEMO Watermarks*