ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1414, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमेधावी सोम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र से छनकर देवों के पीने के लिए जाते हैं. शत्रुओं का आक्रमण सहन करने वाले सोम सभी शत्रुओं को पराजित करते हैं. (१) स हि ष्मा जरितृभ्य आ वाजं गोमन्तमन्वति. पवमानः सहस्रिणम्.. (२) शुद्ध होते हुए वे सोम स्तोताओं के लिए गायों से युक्त हजारों प्रकार का अन्न देते हैं. (२) परि विश्वानि चेतसा मृशसे पवसे मती. स नः सोम श्रवो विदः.. (३) हे सोम! तुम हमारे अनुकूल मन बनाकर हमें सभी प्रकार के धन देते हो. तुम स्तुतियां सुनकर रस देते हो. तुम हमें अन्न दो. (३) अभ्यर्ष बृहद्यशो मघवद्भ्यो ध्रुवं रयिम्. इषं स्तोतृभ्य आ भर.. (४) हे सोम! महान् यश हमारी ओर भेजो, हव्यदाता यजमानों को स्थायी धन दो एवं स्तोताओं को अन्न दो. (४) त्वं राजेव सुव्रतो गिरः सोमा विवेशिथ. पुनानो वह्ने अद्भुत.. (५) हे शोभनकर्म वाले सोम! तुम शुद्ध होकर हमारी स्तुति उसी प्रकार स्वीकार करो, जिस प्रकार राजा स्तुतियां स्वीकार करता है. हे सोम! तुम पवित्र करने वाले एवं अनोखे हो. (५) स वह्निरप्सु दुष्टरो मृज्यमानो गभस्त्योः. सोमश्चमूषु सीदति.. (६) यज्ञादि के वहन करने वाले वे सोम अंतरिक्ष में वर्तमान होकर हाथों द्वारा कठिनाई से रगड़े जाते हैं एवं चमू नामक पात्रों में स्थित होते हैं. (६) क्रीळुर्मखो न मंहयुः पवित्रं सोम गच्छसि. दधत्स्तोत्रे सुवीर्यम्.. (७) हे क्रीड़ाशील एवं दान देने वाले सोम! तुम स्तोता के लिए शोभन बल देते हुए दान के समान दशापवित्र में जाते हो. (७) सूक्त—२१ देवता—सोम एते धावन्तीन्दवः सोमा इन्द्राय घृष्वयः. मत्सरासः स्वर्विदः.. (१) दीप्त शत्रुओं को पराजित करने वाले, मस्त बनाने वाले एवं स्वर्ग प्राप्त कराने वाले सोम इंद्र के पास जाते हैं. (१) प्रवृण्वन्तो अभियुजः सुष्वये वरिवोविदः. स्वयं स्तोत्रे वयस्कृतः.. (२) निचोड़ने की क्रिया का आश्रय लेने वाले एवं रस निचोड़ने वाले को धन प्राप्त कराने