भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1418, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1418

पवस्व वृत्रहन्तमोक्थेभिरनुमाद्यः. शुचिः पावको अद्भुत:... (६) हे शत्रुओं का सर्वाधिक हनन करने वाले, उक्त मंत्रों द्वारा स्तुति करने योग्य, शुद्ध, दूसरों को पवित्र करने वाले एवं अद्भुत सोम! तुम टपको. (६) शुचिः पावक उच्यते सोमः सुतस्य मध्वः. देवावीरघशंसहा.. (७) मादक सोमलता का निचुड़ा हुआ रस शुद्ध एवं दूसरों को पवित्र करने वाला कहलाता है. वह देवों को तृप्त करने वाला एवं असुरहंता है. (७) सूक्त—२५ देवता—पवमान सोम पवस्व दक्षसाधनो देवेभ्यः पीतये हरे. मरुद्भ्यो वायवे मदः.. (१) हे हरितवर्ण, बल के साधक एवं नशीले सोम! तुम मरुतों, वायु एवं अन्य देवों के पीने के लिए टपको. (१) पवमान धिया हितोऽभि योनिं कनिक्रदत्. धर्मणा वायुमा विश.. (२) हे निचोड़े जाते हुए एवं हमारी उंगलियों द्वारा पकड़े गए सोम! तुम शब्द करते हुए अपने स्थान में प्रवेश करो. तुम यज्ञकर्म के साथ वायु के पात्र में प्रवेश करो. (२) सं देवैः शोभते वृषा कविर्योनावधि प्रियः. वृत्रहा देववीतमः.. (३) अपने स्थान में स्थित, अभिलाषापूरक, क्रांत बुद्धि वाले, सबके प्रिय, वृत्र का नाश करने वाले एवं देवों की अधिक अभिलाषा करने वाले पवमान सोम देवों के साथ भली प्रकार शोभा पाते हैं. (३) विश्वा रूपाण्याविशन्पुनानो याति हर्यतः. यत्रामृतास आसते.. (४) निचोड़े जाते हुए सुंदर सोम वहां जाते हैं, जहां देव निवास करते हैं. (४) अरुषो जनयन्गिरः सोमः पवत आयुषक्. इन्द्रं गच्छन्कविक्रतुः.. (५) क्रांत प्रज्ञा वाले एवं दीप्तिशाली सोम अपने समीपवर्ती इंद्र को व्याप्त करके शब्द करते हुए टपकते हैं. (५) आ पवस्व मदिन्तम पवित्रं धारया कवे. अर्कस्य योनिमासदम्.. (६) हे अतिशय मादक एवं क्रांत प्रज्ञा वाले सोम! तुम पूजनीय इंद्र के स्थान को प्राप्त करने के लिए दशापवित्र को पार करके धारा के रूप में बहो. (६) ebook converter DEMO Watermarks*

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