ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1422, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे कुचले जाते हुए सोम! तुम धारा के रूप में नीचे गिरो. स्वर्गीय एवं धरती संबंधी धन के साथ तुम दीप्ति वाला बल लाओ. (६) सूक्त—३० देवता—सोम प्र धारा अस्य शुष्मिणो वृथा पवित्रे अक्षरन्. पुनानो वाचमिष्यति.. (१) इन शक्तिशाली सोम की धाराएं बिना श्रम के ही दशापवित्र पर गिर रही हैं, सोम निचोड़ते समय ध्वनि करते हैं. (१) इन्दुह्रिंयानः सोतृभिर्मृज्यमानः कनिक्रदत्. इयर्ति वग्नुमिन्द्रियम्.. (२) ऋत्विजों द्वारा दशापवित्र पर शुद्ध किए जाते हुए दीप्तिशाली सोम शब्द करते हैं तथा इंद्रसंबंधी ध्वनि करते हैं. (२) आ नः शुष्मं नृषाह्यं वीरवन्तं पुरुस्पृहम्. पवस्व सोम धारया.. (३) हे सोम! तुम अपनी धाराओं से हमारे विरोधी लोगों को हराने वाला, संतानयुक्त व बहुतों द्वारा चाहने योग्य बल क्षरित करो. (३) प्र सोमो अति धारया पवमानो असिष्यदत्. अभि द्रोणान्यासदम्.. (४) निचोड़े जाते हुए सोम द्रोणकलश में जाने के लिए दशापवित्र को पार करके टपकते हैं. (४) अप्सु त्वा मधुमत्तमं हरिं हिन्वन्त्यद्रिभिः. इन्दविन्द्राय पीतये.. (५) हे हरे रंग के एवं अत्यंत नशीले सोम! तुम जल में रहते हो. लोग इंद्र को पिलाने के लिए तुम्हें पत्थरों से कूटते हैं. (५) सुनोता मधुमत्तमं सोममिन्द्राय वज्रिणे. चारुं शर्धाय मत्सरम्.. (६) हे ऋत्विजो! तुम मधुर रस वाले सुंदर व नशीले सोम को इंद्र के लिए निचोड़ो. इसे पीकर इंद्र हमें बल देंगे. (६) सूक्त—३१ देवता—सोम प्र सोमासः स्वाध्य१: पवमानासो अक्रमुः. रयिं कृण्वन्ति चेतनम्.. (१) शोभनकर्म वाले एवं निचोड़ते हुए सोम हमें प्रसिद्ध करने वाला धन देते हुए कलश की ebook converter DEMO Watermarks*