भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1433, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1433

मेधावी स्तोता की स्तुतियों द्वारा सेवित, क्रांत-कर्म वाले सोम यज्ञ में स्थित होकर अपनी धारा को दूर देश तक विस्तृत करते हैं. (२) अयं देवेषु जागृविः सुत एति पवित्र आ. सोमो याति विचर्षणिः.. (३) ये जागरणशील एवं निचुड़े हुए सोम देवों के लिए सभी ओर जाते हैं एवं पवित्र होने के लिए दशापवित्र पर पहुंचते हैं. (३) स नः पवस्व वाजय्युश्क्राणश्चारुमध्वरम्. बर्हिष्माँ आ विवासति.. (४) हे सोम! ऋत्विज् तुम्हारी सेवा करते हैं. तुम हमारे लिए अन्न की इच्छा करते हुए एवं हमारे यज्ञ को कल्याणकारी बनाते हुए टपको. (४) स नो भगाय वायवे विप्रवीरः सदावृधः. सोमो देवेष्वा यमत्.. (५) मेधावी ब्राह्मण सोम को भग और वायु देव के लिए प्रेरित करते हैं. सोम नित्य वृद्ध होकर हमारे लिए देवों का धन दें. (५) स नो अद्य वसुत्तये क्रतुविद् गातुवित्तमः. वाजं जेषि श्रवो बृहत्.. (६) हे यज्ञ को प्राप्त करने वालों में श्रेष्ठ एवं पुण्यलोकों के मार्ग को भली प्रकार जानने वाले सोम! आज हमें धन देने के लिए महान् अन्न एवं बल को जीतो. (६) सूक्त—४५ देवता—सोम स पवस्व मदाय कं नृचक्षा देववीतये. इन्दविन्द्राय पीतये.. (१) हे नेताओं को देखने वाले सोम! तुम यज्ञ की पूर्ति एवं इंद्र के पीने के बाद मद तथा सुख के लिए टपको. (१) स नो अर्षामि दूत्यं१त्वमिन्द्राय तोशसे. देवानत्सखिभ्य आ वरम्.. (२) हे सोम! तुम हमारे दूत बनो. तुम इंद्र के पीने के लिए हो. तुम देवों से हमारे लिए प्रिय धन मांगो. (२) उत त्वामरुणं वयं गोभिरञ्ज्मो मदाय कम्. वि नो राये दुरो वृधि.. (३) हे लाल रंग वाले सोम! हम नशे के लिए तुम्हें गायों के दूध से शुद्ध करते हैं. तुम हमारे लिए धन के द्वार खोलो. (३) अत्यू पवित्रमक्रमीद्वाजी धुरं न यामनि. इन्दुर्वेदेवेषु पत्यते.. (४)