भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1446, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1446

त्वोतासस्तवावसा स्याम वन्वन्त आमुरः. सोम व्रतेषु जागृहि.. (२४) हे सोम! हम तुम्हारे द्वारा रक्षित होकर अपने शत्रुओं को पाते ही मार डालें. तुम हमारे यज्ञकर्मों में जागृत बनो. (२४) अपघ्नन्पवते मृधोऽप सोमो अराव्णः. गच्छन्निन्द्रस्य निष्कृतम्.. (२५) सोम शत्रुओं को मारते हुए, धनदान न करने वालों को मारते हुए तथा इंद्र के स्थान को पाते हुए धारा के रूप में गिरे थे. (२५) महो नो राय आ भर पवमान जही मृधः. रास्वेन्दो वीरवद्यशः.. (२६) हे शुद्ध होते हुए सोम! हमारे लिए महान् धन लाओ, हमें मारने वाले शत्रुओं को मारो तथा हमें संतानयुक्त यश दो. (२६) न त्वा शतं चन हुतो राधो दित्सन्तमा मिनन्. यत्पुनानो मखस्यसे.. (२७) हे सोम! जब तुम शुद्ध होते हुए हमें धन देना चाहते हो, उस समय हमें धन देने वाले तुमको बहुत से शत्रु भी नहीं रोक पाते. (२७) पवस्वेन्दो वृषा सुतः कृधी नो यशसो जने. विश्वा अप द्विषो जहि.. (२८) हे निचुड़े हुए एवं सींचने वाले सोम! तुम धारा के रूप में टपको, हमें जनपदों में यशस्वी बनाओ तथा सभी शत्रुओं को मारो. (२८) अस्य ते सख्ये वयं तवेन्दो द्युम्न उत्तमे. सासह्वाम पृतन्यतः.. (२९) हे इस यज्ञ में वर्तमान सोम! जब हम तुम्हारी मित्रता प्राप्त कर लेंगे एवं तुम्हारे द्वारा दिए गए श्रेष्ठ अन्न से पुष्ट हो जाएंगे तो युद्ध के इच्छुक शत्रुओं को मारेंगे. (२९) या ते भीमान्यायुधा तिग्मानि सन्ति धूर्वणे. रक्षा समस्य नो निदः.. (३०) हे सोम! तुम्हारे जो भयंकर, तीखे और शत्रुवध करने वाले आयुध हैं, उनके द्वारा हमें सभी शत्रुओं की निंदा से बचाओ. (३०) सूक्त—६२ देवता—पवमान सोम एते असृग्रमिन्दवस्तिरः पवित्रमाशवः. विश्वान्यभि सौभगा.. (१) ऋत्विज् सभी धनों को पाने के उद्देश्य से शीघ्र गति वाले एवं शुद्ध होते हुए सोम को दशापवित्र के समीप ले जाते हैं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*