भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1461, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1461

सूक्त—६६ देवता—अग्नि व पवमान सोम पवस्व विश्वचर्षणेऽभि विश्वानि काव्या. सखा सखिभ्य ईड्यः.. (१) हे सबके देखने वाले, सखा एवं स्तुति योग्य सोम! हम सखाओं के सभी अभिलषणीय कर्मों एवं स्तुतियों को देखकर हमारे कल्याण के लिए बरसो. (१) ताभ्यां विश्वस्य राजसि ये पवमान धामनी. प्रतीची सोम तस्थतुः.. (२) हे शुद्ध होते सोम! तुम्हारे जो दो टेढ़े पत्ते हैं, उनसे तुम सारे संसार के राजा बनते हो. (२) परि धामानि यानि ते त्वं सोमासि विश्वतः. पवमान ऋतुभिः कवे.. (३) हे शुद्ध होते हुए एवं क्रांतकर्म वाले सोम! तुम्हारा तेज चारों ओर फैला है. तुम ऋतुओं के साथ सुशोभित हो. (३) पवस्व जनयन्निषोऽभि विश्वानि वार्या. सखा सखिभ्य ऊतये.. (४) हे सखा सोम! हम मित्रों की स्तुतियों पर ध्यान देकर हमारी रक्षा के लिए हमें अन्न देते हुए आओ. (४) तव शुक्रासो अर्चयो दिवस्पृष्ठे वि तन्वते. पवित्रं सोम धामभिः.. (५) हे सोम! तुम्हारी ज्वलनशील एवं तेजपूर्ण रश्मियां द्युलोक के ऊपर वाले भाग पर जल का विस्तार करती हैं. (५) तवेमे सप्त सिन्धवः प्रशिषं सोम सिस्रते. तुभ्यं धावन्ति धेनवः.. (६) हे सोम! ये सात नदियां तुम्हारा शासन मानती हैं एवं गाएं तुम्हारे लिए ही दूध देने के हेतु दौड़कर आती हैं. (६) प्र सोम याहि धारया सुत इन्द्राय मत्सरः. दधानो अक्षिति श्रवः.. (७) हे हमारे द्वारा निचोड़े गए एवं इंद्र को नशा कराने वाले सोम! तुम हमारे लिए अक्षय धन देते हुए दशापवित्र से निकलकर द्रोणकलश में जाओ. (७) समु त्वा धीभिरस्वरन्हिन्वतीः सप्त जामयः. विप्रमाजा विवस्वतः.. (८) हे मेधावी सोम! यजमान के यज्ञ में स्तुति करते हुए सात होता तुम्हारी प्रशंसा करते हैं. (८) ebook converter DEMO Watermarks*