भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1464, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1464

पवमानो रथीतमः शुभ्रेभिः शुभ्रशस्तमः. हरिश्चन्द्रो मरुद्गणः.. (२६) रथ स्वामियों में श्रेष्ठ, यशस्वी लोगों में परम यशस्वी, हरी धाराओं वाले एवं मरुतों की सहायता से युक्त सोम अपनी दीप्तियों से सबको व्याप्त करते हैं. (२६) पवमानो व्यश्ववद्रश्मिभिर्वाजसातमः. दधत्स्तोत्रे सुवीर्यम्.. (२७) अन्न देने वालों में श्रेष्ठ व पवमान स्तोत्र बोलने वाले को शोभन वीर्य वाला पुत्र देने वाले सोम अपनी दीप्तियों से सारे संसार को व्याप्त कर लें. (२७) प्र सुवान इन्दुरक्षाः पवित्रमत्यव्ययम्. पुनान इन्दुरिन्द्रमा.. (२८) पवित्र होते हुए सोम भेड़ के बालों से बने कंबल को पार करके टपकते हैं अर्थात् पवित्र होते हुए सोम इंद्र के पास पहुंचें. (२८) एष सोमो अधि त्वचि गवां क्रीळत्यद्रिभिः. इन्द्रं मदाय जोहुवत्.. (२९) ये किरणरूपी सोम गाय के चमड़े के ऊपर पत्थरों से क्रीड़ा करते हैं. इंद्र ने मद के निमित्त सोम को बुलाया. (२९) यस्य ते द्युम्नवत्पयः पवमानाभृतं दिवः. तेन नो मृळ जीवसे.. (३०) हे पवित्र होते हुए सोम! बाज पक्षी रूपिणी गायत्री द्वारा द्युलोक से लाया गया व अन्नयुक्त दूध तुम्हारा अपना है. हमें उसके द्वारा चिरजीवन पाने के लिए सुखी बनाओ. (३०) सूक्त—६७ देवता—पवमान सोम त्वं सोमासि धारयुर्मन्द्र ओजिष्ठो अध्वरे. पवस्व मंहयद्रयिः.. (१) हे सोम! तुम अतिशय आनंददाता, परम तेजस्वी एवं हमारे यज्ञ में निचुड़ने वाली धाराओं के अभिलाषी हो. तुम स्तोताओं को धन देते हुए नीचे गिरो. (१) त्वं सुतो नृमादनो दधन्वान्मत्सरिन्तमः. इन्द्राय सूरिरन्धसा.. (२) हे सोम! तुम ऋत्विजों को आनंदित करने वाले, यज्ञ धारण करने वाले, विद्वान् एवं हमारे द्वारा निचोड़े गए हो. तुम हव्यरूप अन्न के साथ इंद्र को अतिशय मद करने वाले बनो. (२) त्वं सुष्वाणो अद्रिभिर्भव्यर्ष कनिक्रदत्. द्युमन्तं शुष्ममुत्तमम्.. (३) हे सोम! तुम पत्थरों की सहायता से निचोड़े जाकर शब्द करते हुए द्रोणकलश में आओ ebook converter DEMO Watermarks*

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