भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1514, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1514

अव द्रोणानि घृतवान्ति सीद मदिन्तमो मत्सर इन्द्रपानः.. (१३) हे नशीले रस से युक्त एवं यज्ञस्वामी सोम! तुम जल में रहते हुए भेड़ के बालों से बने दशापवित्ररूप ऊंचे स्थान पर छनो. हे अत्यंत मादक, इंद्र के पीने योग्य एवं नशीले सोम! तुम जलों के साथ द्रोणकलश में ठहरो. (१३) वृष्टिं दिवः शतधारः पवस्व सहस्रसा वाजयुर्देववीतौ. सं सिन्धुभिः कलशे वावशानः समुस्रियाभिः प्रतिरन्न आयुः.. (१४) हे अनेक धाराओं वाले, यज्ञ में यजमानों को हजारों धन देने वाले एवं यजमानों के अन्न की अभिलाषा करने वाले सोम! तुम आकाश से वर्षा करो एवं हमारी आयु को बढ़ाते हुए द्रोणकलश में जल एवं गोदुग्ध से मिलो. (१४) एष स्य सोमो मतिभिः पुनानोऽत्यो न वाजी तरतीदरातीः. पयो न दुग्धमदितेरिषिरमुर्विंव गातुः सुयमो न वोळ्हा.. (१५) सोम स्तोत्रों के साथ शुद्ध किए जाते हैं एवं गतिशील अश्व के समान शत्रुओं को लांघकर जाते हैं. वे गाय के दूध के समान शुद्ध, विस्तृत मार्ग के समान आश्रय योग्य एवं बोझा ढोने वाले घोड़े के समान स्तोताओं के नियंत्रण में रहते हैं. (१५) स्वायुधः सोतृभिः पूयमानोऽभ्यर्ष गुह्यं चारु नाम. अभि वाजं सप्तिरिव श्रवस्याऽभि वायुमभि गा देव सोम.. (१६) हे शोभन आयुध वाले एवं ऋत्विजो द्वारा शुद्ध किए जाते हुए सोम! तुम अपने छिपे हुए एवं सुंदर रसात्मक रूप को धारण करो. हमें जब अन्न की अभिलाषा हो, तब तुम हमें अन्न दो. हे सोमदेव! तुम हमें जीवन एवं गाएं दो. (१६) शिशुं जज्ञानं हर्यतं मृजन्ति शुम्भन्ति वह्निं मरुतो गणेन. कविर्गीर्भिः काव्येना कविः सन्त्सोमः पवित्रमत्येति रेभन्.. (१७) मरुद्गण शिशु के समान स्थित, उत्पन्न एवं सबके द्वारा अभिलषित सोम को मसलते हैं तथा फलवाहक सोम को अपने सात गणों द्वारा सुशोभित करते हैं. मेधावी एवं कविकर्म द्वारा कवि कहलाने वाले सोम शब्द करते हुए एवं स्तुतियां सुनते हुए दशापवित्र को लांघकर जाते हैं. (१७) ऋषिमना य ऋषिकृत्स्वर्षाः सहस्रणीथः पदवीः कवीनाम्. तृतीयं धाम महिषः सिषासन्त्सोमो विराजमनु राजति ष्टुप्.. (१८) ऋषियों के समान मन से सब कुछ देखने वाले, सबके द्रष्टा, सबको प्राप्त होने वाले, हजारों के द्वारा प्रशंसित, कवियों की शब्दरचना पूर्ण करने वाले एवं परमपूज्य सोम द्युलोक ebook converter DEMO Watermarks*