ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1539, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंदेवों को मस्त करने वाले, यज्ञकर्ता, दीप्तिशाली एवं विशेषदृष्टि वाले सोम निचुड़ते हुए सबके दर्शन के लिए टपकते हैं. (३) पुनानः सोम धारयापो वसानो अर्षसि. आ रत्नधा योनिमृतस्य सीदस्युत्सो देव हिरण्ययः.. (४) हे सोम! तुम छनते समय जल में निवास करते हुए धारा के रूप में दशापवित्र में जाते हो. हे रत्नदाता सोम! तुम यज्ञस्थल में बैठते हो. हे दीप्तिशाली सोम! तुम बहने वाले एवं स्वर्णमय हो. (४) दुहान ऊर्धर्दिव्यं मधु प्रियं प्रत्नं सधस्थमासदत्. आपृच्छ्यं धरुणं वाज्यार्षति नृभिर्धूतो विचक्षणः.. (५) सोम मदकारक एवं दिव्य लता को दुहते हुए अपने प्राचीन स्थान अर्थात् अंतरिक्ष में बैठते हैं. इसके बाद ऋत्विजों द्वारा शोधित एवं सबके द्रष्टा सोम जल्दी से यज्ञ में पूछने योग्य एवं यज्ञ के आधार यजमान को अन्न देने के लिए जाते हैं. (५) पुनानः सोम जागृविरव्यो वारे परि प्रियः. त्वं विप्रो अभवोऽङ्गिरस्तमो मध्वा यज्ञं मिमिक्ष नः.. (६) हे जागरणशील एवं प्रिय सोम! तुम छनते समय भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर टपकते हो. तुम मेधावी एवं पितरों के नेता हो. तुम हमारे यज्ञ को अपने मीठे रस से भर दो. (६) सोमो मीढ्वान्पवते गातुवित्तम ऋषिर्विप्रो विचक्षणः. त्वं कविरभवो देववीतम आ सूर्यं रोहयो दिवि.. (७) अभिलाषापूरक, मार्गदर्शकों में श्रेष्ठ, सबको दिखाने वाले, मेधावी एवं विशेष द्रष्टा सोम टपकते हैं. हे बुद्धिमान् एवं देवाभिलाषियों में उत्तम सोम! तुम सूर्य को अंतरिक्ष में प्रकट करते हो. (७) सोम उ षुवाणः सोतृभिरधि ष्णुभिरवीनाम्. अश्व्येव हरिता याति धारया मन्द्रया याति धारया.. (८) निचोड़ने वाले ऋत्विजों द्वारा निचुड़े हुए सोम ऊंचे एवं भेड़ के बालों से बने दशापवित्र पर जाते हैं. सोम अपनी नशीली एवं हरे रंग की धारा के द्वारा द्रोणकलश में जाते हैं. (८) अनूपे गोमान्गोभिरक्षाः सोमो दुग्धाभिरक्षाः. समुद्रं न संवरणान्यग्मन्मन्दी मदाय तोशते.. (९) ebook converter DEMO Watermarks*