ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1546, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंपवस्व सोम द्युम्नी सुधारो महामवीनामनु पूर्व्यः.. (७) हे यशस्वी, शोभनधाराओं वाले एवं प्राचीन सोम! तुम भेड़ के बालों से बने दशापवित्र के छिद्रों से होकर बहो. (७) नृभिर्येमानो जज्ञानः पूतः क्षरद्विश्वानि मन्द्रः स्वर्वित्.. (८) ऋत्विजों द्वारा संयमित, उत्पन्न, पवित्र, मोदयुक्त एवं सबको जानने वाले सोम हमें सब धन दें. (८) इन्दुः पुनानः प्रजामुराणः करद्विश्वानि द्रविणानि नः.. (९) देवों को बढ़ाने वाले एवं शुद्ध होते हुए सोम हमें संतान एवं सभी धन दें. (९) पवस्व सोम क्रत्वे दक्षायश्वो न निक्तो वाजी धनाय.. (१०) हे अश्व के समान जल से धोए गए एवं वेगशाली सोम! तुम हमें ज्ञान, बल और धन देने के लिए टपको. (१०) तं ते सोतारो रसं मदाय पुनन्ति सोमं महे द्युम्नाय.. (११) हे सोम! रस निचोड़ने वाले लोग नया एवं महान् अन्न पाने के लिए तुम्हारा रस शुद्ध करते हैं. (११) शिशुं जज्ञानं हरिं मृजन्ति पवित्रे सोमं देवेभ्य इन्दुम्.. (१२) ऋत्विज् जल के पुत्र, जन्म लेने वाले, हरितवर्ण एवं दीप्तिशाली सोम को देवों के लिए दशापवित्र पर छानते हैं. (१२) इन्दुः पविष्ट चारुर्मदायापामुपस्थे कविर्भगाय.. (१३) कल्याणकारक एवं बुद्धिमान् सोम जलों के समान अंतरिक्ष में मद एवं धन के लिए शुद्ध होते हैं. (१३) बिभर्ति चार्विन्द्रस्य नाम येन विश्वानि वृत्रा जघान.. (१४) सोम इंद्र के कल्याणकारी शरीर का पोषण करते हैं, उसी शरीर से इंद्र ने सब राक्षसों को मारा. (१४) पिबन्त्यस्य विश्वे देवासो गोभिः श्रीतस्य नृभिः सुतस्य.. (१५) गायों के दूध-दही से मिले हुए एवं ऋत्विजों द्वारा निचोड़े हुए सोम को सभी देव पीते हैं. (१५) ebook converter DEMO Watermarks*