ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1553, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयत्रानन्दाश्च मोदाश्च मुदः प्रमुद आसते. कामस्य यत्राप्ताः कामास्तत्र माममृतं कृधीन्द्रायेन्दो परि स्रव.. (११) हे सोम! जिस लोक में आनंद, मोह और सुख रहते हैं व जहां सब अभिलाषाएं पूरी हो जाती हैं, वहां मुझे मरणरहित बनाओ एवं इंद्र के लिए अपना रस नीचे गिराओ. (११) सूक्त—११४ देवता—पवमान सोम य इन्डोः पवमानस्यान् धामान्यक्रमीत्. तमाहुः सुप्रजा इति यस्ते सीमाविधन्मन इन्द्रायेन्दो परि स्रव.. (१) शुद्ध होते हुए सोम के तेज का जो ब्राह्मण अनुगमन करता है, लोग उसे शोभन प्रजा वाला कहते हैं. जो अपना मन सोम के अनुकूल बना लेता है, उसे भी भाग्यशाली कहते हैं. हे सोम! तुम इंद्र के लिए रस टपकाओ. (१) ऋषे मन्त्रकृतां स्तोमैः कश्यपोर्द्ध्वयन्गिरः. सोमं नमस्य राजानं यो जज्ञे वीरुधां पतिरिन्द्रायेन्दो परि स्रव.. (२) हे कश्यप ऋषि! मंत्ररचना करने वालों की स्तुतियों के आधार पर अपने वचनों को बढ़ाते हुए राजा सोम को नमस्कार करो. सोम वनस्पतियों के पालक के रूप में उत्पन्न हुए हैं. हे सोम! तुम इंद्र के लिए टपको. (२) सप्त दिशो नानासूर्याः सप्त होतार ऋत्विजः. देवा आदित्या ये सप्त तेभिः सोमाभि रक्ष न इन्द्रायेन्दो परि स्रव.. (३) हे सोम! ये जो सात दिशाएं सूर्य का आश्रय हैं, होम करने वाले जो सात ऋत्विज् हैं तथा आदित्य आदि जो सात सूर्य हैं, उनके साथ मिलकर हमारी रक्षा करो. हे सोम! इंद्र के लिए रस टपकाओ. (३) यत्ते राजञ्छृतं हविस्तेन सोमाभि रक्ष नः. अरातीवा मा नस्तारीन्मो च नः किं चनाममदिन्द्रायेन्दो परि स्रव.. (४) हे राजा सोम! तुम्हारे लिए जो हवि पकाया गया है, उससे हमारी रक्षा करो. शत्रु हमारा वध न करे एवं हमारा धन आदि कुछ भी नष्ट न करें. तुम इंद्र के लिए रस टपकाओ. (४) ebook converter DEMO Watermarks*