ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1563, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस्वयं यजस्व दिवि देव देवान्किं ते पाकः कृणवदप्रचेताः. यथायज ऋतुभिर्देव देवानेवा यजस्व तन्वं सुजात.. (६) हे दीप्तिशाली अग्नि! तुम द्युलोक में रहने वाले देवों का यज्ञ करो. कच्ची बुद्धि वाले और ज्ञानरहित लोग तुम्हारे बिना क्या कर सकेंगे? हे शोभन जन्म वाले अग्नि! तुमने जिस प्रकार समयसमय पर देवों के यज्ञ किए हैं, उसी प्रकार अपना भी यज्ञ करो. (६) भवा नो अग्नेऽवितोत गोपा भवा वयस्कृदुत नो वयोधाः. रास्वा च नः सुमहो हव्यदातिं त्रास्वोत नस्तन्वो३ अप्रयुच्छन्.. (७) हे अग्नि! तुम दृष्ट और अदृष्ट दोनों प्रकार के भयों से हमारी रक्षा करो. तुम हमारे लिए अन्न उत्पन्न करो एवं अन्न दो. हे शोभन पूजा योग्य अग्नि! तुम हमें हव्य सामग्री का दान करो एवं हमारे शरीरों का पालन करो. (७) सूक्त—८ देवता—अग्नि व इंद्र प्र केतुना बृहता यात्यग्निरा रोदसी वृषभो रोरवीति. दिवश्चिदन्ताँ उपमाँ उदानळपामुपस्थे महिषो ववर्ध.. (१) अग्नि बड़ा झंडा लेकर द्यावा-पृथिवी के बीच में जाते हैं एवं देवों को बुलाने के लिए बैल के समान शब्द करते हैं. अग्नि द्युलोक से दूर या समीप रहकर उसे व्याप्त करते हैं एवं जल के भंडार अंतरिक्ष में बिजली के रूप में बढ़ते हैं. (१) मुमोद गर्भो वृषभः ककुद्मान्सेमा वत्सः शिमीवाँ अरावीत्. स देवतात्युद्यतानि कृण्वन्त्स्वेषु क्षयेषु प्रथमो जिगाति.. (२) अभिलाषापूरक एवं उन्नत तेज वाले अग्नि द्यावा-पृथिवी के मध्य में प्रसन्न होते हैं. प्रातःकाल एवं निशा के प्रसिद्ध पुत्र एवं यज्ञकर्म करने वाले अग्नि शब्द करते हैं. वे यज्ञ में उत्साहपूर्ण कर्म करते हैं, अपने स्थानों में रहते हैं एवं देवों के प्रमुख बनकर जाते हैं. (२) आ यो मूर्धानं पित्रोररब्ध न्यध्वरे दधिरे सूरो अर्णः. अस्य पत्मन्नरुषीरश्वबुध्ना ऋतस्य योनौ तन्वो जुषन्त.. (३) अग्नि अपने माता-पिता द्यावा-पृथिवी के सिर पर अपने तेज से रमण करते हैं. यज्ञकर्त्ता शोभनशक्ति वाले अग्नि के तेज को यज्ञ में धारण करते हैं. अग्नि के पतन के समय सुशोभित स्तोता यज्ञ के स्थान में व्याप्त अग्नि के शरीर की सेवा करते हैं. (३) उषउषो हि वसो अग्रमेषि त्वं यमयोरभवो विभावा. ऋताय सप्त दधिषे पदानि जनयन्मित्रं तन्वे३ स्वायै.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*