भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1573, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1573

का पोषण करती हैं. (५) सूक्त—१४ देवता—पितृलोक आदि परेयिवांसं प्रवतो महीरनु बहुभ्यः पन्थामनुपस्पशानम्. वैवस्वतं सङ्गमनं जनानां यमं राजानं हविषा दुवस्य.. (१) हे यजमान! तुम पितरों के स्वामी यम की पुरोडाश आदि के द्वारा सेवा करो. यम बहुत से पुण्यकर्म करने वालों को सुख देने वाले स्थानों में ले जाते हैं, बहुतों का मार्ग सरल बनाते हैं एवं सभी मनुष्यों की मंजिल एक है. (१) यमो नो गातुं प्रथमो विवेद नैषा गव्यूतिरपभर्तवा उ. यत्रा नः पूर्वे पितरः परेयुरेना जज्ञानाः पथ्या३ अनु स्वाः.. (२) सबके प्रमुख यम हमारे मार्गों को जानते हैं. यम के मार्ग का नाश कोई नहीं कर सकता. जिस मार्ग से पूर्ववर्ती पितर गए हैं, उसीसे हम सब लोग जावें. (२) मातली कव्यैर्यमो अङ्गिरोभिर्बृहस्पतिर्ऋक्वभिर्वावृधानः. याँश्च देवा वावृधुर्यै च देवान्त्स्वाहान्ये स्वधयान्ये मदन्ति.. (३) इंद्र कव्य नामक पितरों की सहायता से, यम अंगिरा नामक पितरों की सहायता से और बृहस्पति ऋक्व नामक पितरों की सहायता से बढ़ते हैं. देवों की संवर्धना करने वाले एवं देवों द्वारा संबंधित लोग भी बढ़ते हैं. देवों में कोई स्वाहा और कोई स्वधा के द्वारा प्रसन्न होता है. (३) इमं यम प्रस्तरमा हि सीदाङ्गिरोभिः पितृभिः संविदानः. आ त्वा मन्त्राः कविशस्ता वहन्त्वेना राजन्हविषा मादयस्व.. (४) हे यम! अंगिरा नामक पितरों के साथ एकता रखते हुए तुम इस विस्तृत यज्ञ में आकर बैठो. विद्वान् ऋत्विजों द्वारा बोले हुए मंत्र तुम्हें बुलावें. हे स्वामी यम! तुम इस हवि से प्रसन्न बनो. (४) अङ्गिरोभिरा गहि यज्ञियेभिर्यम वैरूपैरिह मादयस्व. विवस्वन्तं हुवे यः पिता तेऽस्मिन्यज्ञे बर्हिष्या निषद्य.. (५) हे यम! नानारूप धारी एवं यज्ञकर्त्ता अंगिराओं के साथ इस यज्ञ में पधारो एवं यजमान को प्रसन्न करो. मैं तुम्हारे पिता विवस्वान् को बुलाता हूं. वे इस यज्ञ में बैठकर यजमान को प्रसन्न करें. (५) अङ्गिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वाणो भृगवः सोम्यासः. ebook converter DEMO Watermarks*