भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1576, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1576

जो बाबा आदि पितर पहले मरे हैं, जो बड़े भाई आदि पितर बाद में मरे हैं, जो पृथिवी पर जन्म लेकर आ गए हैं अथवा जो शोभन धन वाली प्रजाओं के बीच हैं, उनके लिए यह नमस्कार है. (२) आहं पितॄन्त्सुविदत्राँ अवित्सि नपातं च विक्रमणं च विष्णोः. बर्हिषदो ये स्वधया सुतस्य भजन्त पित्वस्त इहागमिष्ठाः.. (३) मैंने ऐसे पितरों को पाया है जो मेरी भक्ति को भली-भांति जानते हैं. मैंने व्यापक यज्ञ की नित्यता एवं पूरा करने का उपाय भी पाया है. जो पितर कुशों पर बैठकर सोमरस पीते हुए प्रसन्न होते हैं, वे इस कर्म में आवें. (३) बर्हिषदः पितर ऊत्य१र्वागिमा वो हव्या चक्रमा जुषध्वम्. त आ गतावसा शन्तमेनाथा नः शं योररपो दधात.. (४) हे कुशों पर बैठने वाले पितरो! इस समय तुम हमारी रक्षा करो. हमने तुम्हारे लिए ये हव्य तैयार किए हैं, तुम इनका उपभोग करो. तुम आओ और रक्षा करते हुए हमारा कल्याण करो. तुम हमें सुखी करो, हमारा दुःख मिटाओ और हमें पापरहित बनाओ. (४) उपहूताः पितरः सोम्यासो बर्हिष्येषु निधिषु प्रियेषु. त आ गमन्तु त इह श्रुवन्त्वधि ब्रुवन्तु तेऽवन्त्वस्मान्.. (५) कुशों के ऊपर प्रिय द्रव्य रखे जाने के बाद सोमरस के प्रेमी पितर बुलाए गए हैं. वे वहां आवें, हमारी स्तुतियां सुनें, स्तुतियां सुनकर अपनी प्रसन्नता प्रकट करें एवं हमारी रक्षा करें. (५) आच्या जानु दक्षिणतो निषद्योमं यज्ञमभि गृणीत विश्वे. मा हिंसिष्ट पितरः केनचिन्नो यद्व आगः पुरुषता कराम.. (६) हे पितरो! तुम सब मेरी दाहिनी ओर धरती पर घुटने टेककर बैठो और तुम सब इस यज्ञ की प्रशंसा करो. हम पुरुष होने के कारण भूल से पाप कर बैठते हैं. तुम किसी पाप के कारण हमारी हिंसा मत करो. (६) आसीनासो अरुणीनामुपस्थे रयिं धत्त दाशुषे मर्त्याय. पुत्रेभ्यः पितरस्तस्य वस्वः प्र यच्छत त इहोर्जं दधात.. (७) हे लाल ज्वालाओं के समीप बैठने वाले पितरो! हव्य देने वाले मनुष्य को धन दो, तुम यजमान के पुत्रों को धन दो तथा हमारे इस यज्ञ में धन धारण करो. (७) ये नः पूर्वे पितरः सोम्यासोऽनूहिरे सोमपीथं वसिष्ठाः. तेभिर्यमः संरणानो हवींष्युशन्नुशद्भिः प्रतिकाममत्तु.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*

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