ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1580, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंउशन्तस्त्वा नि धीमहुशन्तः समिधीमहि. उशन्नुशत आ वह पितॄन्हविषे अत्तवे.. (१२) हे अग्नि! मैं तुम्हारी कामना करता हुआ तुम्हें स्थापित करता हूं एवं प्रज्वलित करता हूं. तुम भी कामना करते हुए हव्य की अभिलाषा करने वाले देवों के पास होम की सामग्री इसलिए ले जाओ कि वे उसे खा सकें. (१२) यं त्वमग्ने समदहस्तमु निर्वापया पुनः. कियाम्बवत्र रोहतु पाकदुर्वा व्यल्कशा.. (१३) हे अग्नि! तुमने जिसे जलाया है, उसे पुनः बुझाओ. जिस जगह पर कुछ जल भरा हो और अनेक शाखाओं वाली पकी दूब खड़ी हो. (१३) शीतिके शीतिकावति ह्लादिके ह्लादिकावति. मण्डूक्या३ सु सं गम इमं स्व१ग्निं हर्षय.. (१४) हे शीतल एवं वनस्पतियों से युक्त पृथिवी! तुम लोगों को प्रसन्न करती हो. तुम्हारे ऊपर बहुत आह्लादक वनस्पतियां हैं. तुम ऐसी वर्षा लाओ, जिससे मेंढक संतुष्ट हों. तुम अग्नि को प्रसन्न करो. (१४) सूक्त—१७ देवता—सरण्यू आदि त्वष्टा दुहित्रे वहतुं कृणोतीतीदं विश्वं भुवनं समेति. यमस्य माता पर्युह्यमाना महो जाया विवस्वतो ननाश... (१) त्वष्टा अपनी कन्या सरण्यू का विवाह करने वाले हैं. विवाह की तैयारी में सारा संसार सम्मिलित है. यम और यमी की माता का जब सूर्य से विवाह हुआ, तब सूर्य की पत्नी उत्तर कुरु देश से चली गई. (१) अपागूहन्नमृतां मर्त्येभ्यः कृत्वी सवर्णामददुर्विवस्वते. उताश्विनावभरद्यत्तदासीदजहादु द्वा मिथुना सरण्यूः.. (२) मरणरहित सरण्यू को मनुष्यों के बीच छिपाया गया और सरण्यू के समान दूसरी स्त्री बनाकर सूर्य को दी गई. सरण्यू उस समय घोड़ी के रूप में छिपाई गई थी. उसने अश्विनीकुमारों को गर्भ के रूप में धारण किया और दो बालकों को जुड़वां रूप में जन्म दिया. (२) पूषा त्वेतश्च्यावयतु प्र विद्वाननष्टपशुर्भुवनस्य गोपाः. स त्वैतेभ्यः परि ददत्पितृभ्योऽग्निर्देवेभ्यः सुविदत्रियेभ्यः... (३) हमारी भक्ति को जानने वाले, अमर पशुओं से युक्त एवं सारे संसार के रक्षक पूषा तुम्हें