ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1591, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयद्व शुष्णस्य दम्भयो जातं विश्वं सयावभिः.. (११) हे शूर एवं वज्रधारी इंद्र! युद्धक्षेत्र में शीघ्र होने वाले तुम्हारे दान की स्तोता स्तुति करते हैं. तुमने मरुतों को साथ लेकर शुष्ण असुर के पूरे वंश का नाश कर डाला. (११) माकुध्र्यागिन्द्र शूर वस्वीरस्मे भूवन्नभिष्टयः. वयंवयं त आसां सुम्ने स्याम वज्रिवः.. (१२) हे शूर इंद्र! हमारी महान् प्रार्थनाएं निष्फल न हों. हे वज्रधारी इंद्र! तुम्हारी कृपा से हम सब अभिलाषाएं एवं सुख भोगें. (१२) अस्मे ता त इन्द्र सन्तु सत्याहिंसन्तीरुपस्पृशः. विद्याम यासां भुजो धेनूनां न वज्रिवः.. (१३) हे इंद्र! तुम्हारे प्रति की गई हमारी स्तुतियां सच्ची हों एवं तुम्हें कष्ट न दें. हे वज्रधारी इंद्र! लोग जिस प्रकार गायों के दूध का उपभोग करते हैं, उसी प्रकार हम तुम्हारी कृपा से भोगों को प्राप्त करें. (१३) अहस्ता यदपदी वर्धत क्षाः शचीभिर्वेद्यानाम्. शुष्णं परि प्रदक्षिणिद्विश्चायवे नि शिश्रथः.. (१४) हे इंद्र! हाथों और पैरों से विहीन यह धरती देवों की क्रियाओं से ही बढ़ी है. पृथ्वी के चारों ओर स्थित शुष्ण असुर को तुमने इसलिए मारा कि सब लोग चल फिर सकें. (१४) पिबापिबेदिन्द्र शूर सोमं मा रिषण्यो वसवान वसुः सन्. उत त्रायस्व गृणतो मघोनो महश्च रायो रेवतस्कृधी नः.. (१५) हे शूर इंद्र! तुम सोमरस को जल्दीजल्दी पिओ. हे धनस्वामी इंद्र! तुम प्रसिद्ध होकर हमारी हिंसा मत करना तथा स्तुति करने वाले यजमान की रक्षा करना. तुम हमें अधिक धन देकर धनी बनाओ. (१५) सूक्त—२३ देवता—इंद्र यजामह इन्द्रं वज्रदक्षिणं हरीणां रथ्यं१ विव्रतानाम्. प्र श्मश्रु दोधुवदूर्ध्वथा भूद्धि सेनाभिर्देयमानो वि राधसा.. (१) हम दक्षिण हाथ में वज्र धारण करने वाले एवं अनेक कर्मों में कुशल घोड़ों को रथ में जोड़ने वाले इंद्र की पूजा करते हैं. इंद्र सोमपान के बाद अपनी दाढ़ी हिलाते हुए ऊपर प्रकट हुए एवं अपनी सेवाओं द्वारा विविध शत्रुओं को मारते हुए स्तोताओं को धन देते हैं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*