ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1595, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसमाकृणोषि जीवसे वि वो मदे विश्वा सम्पश्यन्भुवना विवक्षसे.. (६) हे सोम! हमारे पशुओं एवं नानारूप में स्थित इस विश्व की रक्षा करो. तुम सोमरस का मद होने पर सारे जगत् में खोजकर हमारे जीवन के लिए आवश्यक वस्तुएं ला देते हो, इसलिए तुम महान् हो. (६) त्वं नः सोम विश्वतो गोपा अदाभ्यो भव. सेध राजन्नप स्रिधो वि वो मदे मा नो दुःशंस ईशता विवक्षसे.. (७) हे अपराजेय सोम! तुम सभी प्रकार से हमारी रक्षा करने वाले बनो. हे राजा सोम! तुम हमारे शत्रुओं को दूर करो. सोम का नशा होने पर निंदक हमारा स्वामी न बने, इसलिए तुम महान् हो. (७) त्वं नः सोम सुक्रतुर्वयोधेयाय जागृहि. क्षेत्रवित्तरो मनुषो वि वो मदे द्रुहो नः पाह्यंहसो विवक्षसे.. (८) हे शोभन कर्म वाले सोम! तुम हमें अन्न देने के लिए सावधान रहो. तुम खेत देने वालों में उत्तम हो. सोम का नशा होने पर तुम शत्रु मनुष्य एवं पाप से हमारी रक्षा करो, क्योंकि तुम महान् हो. (८) त्वं नो वृत्रहन्तमेन्द्रस्येन्दो शिवः सखा. यत्सीं हवन्ते समिथे वि वो मदे युध्यमानास्तोकसातौ विवक्षसे.. (९) हे शत्रुहंताओं में श्रेष्ठ सोम! अत्यंत महान् संग्राम में युद्ध करते हुए शत्रु जब सब ओर से ललकारते हैं, तब तुम हमारी रक्षा करो. तुम इंद्र के कल्याणकारक मित्र हो. तुम विशेष मद के कारण महान् हो. (९) अयं घ स तुरो मद इन्द्रस्य वर्धत प्रियः. अयं कक्षीवतो महो वि वो मदे मतिं विप्रस्य वर्धयद्विवक्षसे.. (१०) सोम शीघ्र काम करने वाले, नशीले एवं इंद्र को तृप्ति देने वाले हैं. वे हमारी बुद्धि को बढ़ावें. सोम ने महान् मेधावी कक्षीवान् ऋषि की बुद्धि को बढ़ाया था. वे विशेष मद के कारण महान् हैं. (१०) अयं विप्राय दाशुषे वाजाँ इयर्ति गोमतः. अयं सप्तभ्य आ वरं वि वो मदे प्रान्धं श्रोणं च तारिषद्विवक्षसे.. (११) सोम बुद्धिमान् यजमान को पशुयुक्त अन्न देते हैं. एवं सात होताओं को उत्तम धन प्रदान करते हैं. सोम ने अंधे दीर्घतमा ऋषि को आंखें देकर और लंगड़े परावृज ऋषि को पैर देकर विशेष रूप से बढ़ाया था. सोम विशेष मद के कारण महान् हैं. (११) ebook converter DEMO Watermarks*