ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 167, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! श्रेष्ठ एवं विविध प्रकार का धन हमारे पास भेजो. हमारे भोग के लिए पर्याप्त एवं अधिक धन तुम्हारे ही पास है. (५) अस्मान्त्सु तत्र चोदयेंद्र राये रभस्वतः. तुविद्युम्न यशस्वतः.. (६) हे अधिक संपत्ति वाले इंद्र! धन की सिद्धि के लिए हमें यज्ञ रूपी कर्म की प्रेरणा दो. हम उद्योगशील एवं कीर्ति वाले हों. (६) सं गोमदिन्द्र वाजवदस्मे पृथु श्रवो बृहत्. विश्वायुर्धेह्यक्षितम्.. (७) हे इंद्र! हमें गायों एवं अन्न के साथ-साथ अधिक मात्रा में धन दो. यह धन इतना विस्तृत हो कि समस्त आयु भर खर्च होने पर भी समाप्त न हो. (७) अस्मे धेहि श्रवो बृहद् द्युम्नं सहस्रसातमम्. इन्द्र ता रथिनीरिषः.. (८) हे इंद्र! हमें विशाल यश, अनेक रथों में भरा हुआ अन्न एवं ऐसा धन दो, जिससे हम हजारों की संख्या में दान कर सकें. (८) वसोरिन्द्रं वसुपतिं गीर्भिर्गृणन्त ऋग्मियम्. होम गन्तारमूतये.. (९) अपने धन की रक्षा करने के लिए हम स्तुतियों द्वारा इंद्र को बुलाते हैं. इंद्र धन के रक्षक, ऋचाओं से प्रेम करने वाले एवं यज्ञस्थान में गमन करने वाले हैं. (९) सुतेसुते न्योकसे बृहद् बृहत एदरिः. इन्द्राय शूषमर्चति.. (१०) सब यजमान प्रत्येक यज्ञ में इंद्र के महान् पराक्रम की प्रशंसा करते हैं. इंद्र यज्ञ में सदा निवास करने वाले एवं शक्तिसंपन्न हैं. (१०) सूक्त—१० देवता—इंद्र गायन्ति त्वा गायत्रिणो ऽर्चन्त्यर्कमर्किणः. ब्रह्माणस्त्वा शतक्रत उद्वंशमिव येमिरे.. (१) हे शतक्रतु इंद्र! उद्गाता तुम्हारी स्तुति करते हैं. पूजार्थक मंत्र बोलने वाले होता पूजा के योग्य इंद्र की अर्चना करते हैं. जिस प्रकार बांस के ऊपर नाचने वाले कलाकार बांस को ऊपर उठाते हैं, उसी प्रकार स्तुति करने वाले ब्राह्मण तुम्हारी उन्नति करते हैं. (१) यत्सानोः सानुमारुहद् भूर्यस्पष्ट कृत्वम्. तदिन्द्रो अर्थं चेतति यूथेन वृष्णिरेजति.. (२) जब यजमान सोमलता खोजने के लिए एक पर्वत से दूसरे पर्वत पर जाता है और ebook converter DEMO Watermarks*