ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1676, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयज्ञ के द्वारा प्रवृद्ध देवों को इसलिए बुलाता हूं कि मेरा यज्ञ बिना विघ्नों के समाप्त हो सके. (१) इन्द्रप्रसूता वरुणप्रशिष्टा ये सूर्यस्य ज्योतिषो भागमानशुः. मरुद्गणे वृजने मन्म धीमहि माघोने यज्ञं जनयन्त सूरयः.. (२) हम इंद्र द्वारा प्रेरित, वरुण द्वारा अनुमोदित, ज्योतिर्मय सूर्य के मार्ग को व्याप्त करने वाले एवं शत्रुनाशक मरुतों की स्तुति करते हैं. हे विद्वान् यजमान! उन्हीं इंद्र पुत्र मरुतों के लिए हम यज्ञ की तैयारी करते हैं. (२) इन्द्रो वसुभिः परि पातु नो गयमादित्यैर्नो अदितिः शर्म यच्छतु. रुद्रो रुद्रेभिर्देवो मृळयाति नस्त्वष्टा नो ग्नाभिः सुविताय जिन्वतु.. (३) इंद्र वसुओं के साथ हमारे घर की रक्षा करें. अदिति देवों के साथ हमारा कल्याण करें. रुद्रदेव मरुतों के साथ हमें सुखी करें. त्वष्टा अपनी पत्नियों के साथ हमें अभ्युदय के लिए प्रसन्न करें. (३) अदितिर्द्यावापृथिवी ऋतं महदिन्द्राविष्णू मरुतः स्वर्बृहत्. देवाँ आदित्याँ अवसे हवामहे वसून् रुद्रान्तस्वितारं सुदंससम्.. (४) अदिति, द्यावा-पृथिवी, महान् सत्य, इंद्र, विष्णु, मरुत्, विस्तृत स्वर्ग, देवों, आदित्यों, वसुओं, रुद्रों और उत्तम दान करने वाले सूर्य को हम अपनी रक्षा के लिए बुलाते हैं. (४) सरस्वान्धीभिर्वरुणो धृतव्रतः पूषा विष्णुर्महिमा वायुरश्विना. ब्रह्मकृतो अमृता विश्ववेदसः शर्म नो यंसन् त्रिवरूथमंहसः.. (५) बुद्धि से युक्त सागर, व्रत धारण करने वाले वरुण, पूषा, महत्त्वयुक्त विष्णु, वायु, अश्विनीकुमार व स्तोता को अन्न देने वाले, मरणरहित, सर्वज्ञ व पापनाशक देवगण हमें तीन मंजिल वाला मकान दें. (५) वृषा यज्ञो वृषणः सन्तु यज्ञिया वृषणो देवा वृषणो हविष्कृतः. वृषणा द्यावापृथिवी ऋतावरी वृषा पर्जन्यो वृषणो वृषस्तुभः.. (६) यज्ञ हमारी कामनाएं पूरी करें. यज्ञ के पात्र देवगण हमारी अभिलाषा पूरी करने वाले हों. देवगण, हव्य संग्रह करने वाले, यज्ञयुक्त ऋतावरी, पर्जन्य और स्तोता सब हमारी कामना करें. (६) अग्नीषोमा वृषणा वाजसातये पुरुप्रशस्ता वृषणा उप ब्रुवे. यावीजिरे वृषणो देवयज्यया ता नः शर्म त्रिवरूथं वि यंसतः.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*