ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1682, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअश्नापिनद्धं मधु पर्यपश्यन्मत्स्यं न दीन उदनि क्षियन्तम्. निष्टज्जभार चमसं न वृक्षाद् बृहस्पतिर्विर्वेणा विकृत्य.. (८) बृहस्पति ने पर्वत में बंद मधुर गायों को इस प्रकार देखा, जिस प्रकार थोड़े जल में मछलियां विकल दिखाई देती हैं. जिस प्रकार पेड़ की लकड़ी से सोमरस का पात्र चमस निकाला जाता है, उसी प्रकार बृहस्पति ने पर्वत से गायों को बाहर निकाला. (८) सोषामविन्दत्स स्व१: सो अग्निं सो अर्केण वि बबाधे तमांसि. बृहस्पतिर्गोवपुषो वलस्य निर्मज्जानं न पर्वणो जभार.. (९) बृहस्पति ने गायों को देखने के लिए उषा को प्राप्त किया तथा सूर्य एवं अग्नि की सहायता से अंधकार को मिटाया. जैसे हड्डी से मज्जा बाहर निकाली जाती है, उसी प्रकार बृहस्पति ने बल राक्षस की सुरक्षा से गायों को बाहर निकाला. (९) हिमेव पर्णा मुषिता वनानि बृहस्पतिनाकृपयद्वलो गा:. अनानुकृत्यमपुनश्चकार यात्सूर्यामासा मिथ उच्चरात:.. (१०) पाला जिस प्रकार कमल के पत्तों को नष्ट कर देता है, उसी प्रकार बल राक्षस द्वारा चुराई गई गायों का बृहस्पति ने हरण किया. यह कार्य दूसरे के द्वारा होना संभव नहीं था और न कोई इसका अनुकरण कर सकता है. इस कार्य से सूर्य और चंद्रमा दिन तथा रात में उदित होने लगे. (१०) अभि श्यावं न कृशनेभिरश्वं नक्षत्रेभि: पितरो द्यामपिंशन्. रात्र्यां तमो अदधुर्ज्योतिरहन्बृहस्पतिर्भिन्दद्रिं विदद्गा:.. (११) सबका पालन करने वाले देवों ने आकाश को नक्षत्रों से इस प्रकार सजाया है, जिस प्रकार काले रंग के घोड़े को सोने के आभूषणों से सुशोभित किया जाता है. देवों ने रात में अंधकार तथा दिन में प्रकाश धारण किया. उसी समय बृहस्पति ने अपनी शक्ति से शिलासमूह को भेदकर गायों को प्राप्त किया. (११) इदमकर्म नमो अभियाय य: पूर्वीर्वन्वानोनवीति. बृहस्पति: स हि गोभि: सो अश्वै: स वीरेभि: स नृभिनो वयो धात्.. (१२) जिन बृहस्पति ने अनेक ऋचाओं को क्रम से कहा तथा जो आकाशवासी हो गए हैं, उनको हमने नमस्कार किया. वे हमें गायों, घोड़ों, संतान एवं सेवाओं से युक्त धन दें. (१२) सूक्त—६९ देवता—अग्नि भद्रा अग्नेर्ध्वस्यस्य संदृशो वामी प्रणीति: सुरणा उपेतय:. ebook converter DEMO Watermarks*