ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1687, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त—७१ देवता—ब्रह्मज्ञान बृहस्पते प्रथमं वाचो अग्रं यत्प्रैरत नामधेयं दधानाः. यदेषां श्रेष्ठं यदरिप्रमासीत्प्रेणा तदेषां निहितं गुहाविः.. (१) हे बृहस्पति! बच्चे सबसे पहले पदार्थों का नाम मात्र जानते हैं. यह उनकी भाषा की पहली सीढ़ी है. बालकों का जो पापरहित वेदार्थ ज्ञान है, वह गुहा में छिपा हुआ रहता है. वह ज्ञान सरस्वती की कृपा से प्रकट होता है. (१) सक्तुमिव तितउना पुनन्तो यत्र धीरा मनसा वाचमक्रत. अत्रा सखायः सख्यानि जानते भद्रैषां लक्ष्मीर्निहिताधि वाचि.. (२) जिस प्रकार सत्तू वाले भुने हुए जौ सूप से शुद्ध किए जाते हैं, उसी प्रकार विद्वान् लोग मन में विचार करके शुद्ध भाषा बोलते हैं. उस समय विद्वान् लोग मित्रताओं को जानते हैं. इनके वचनों में मंगलकारिणी लक्ष्मी छिपी रहती हैं. (२) यज्ञेन वाचः पदवीयमायन्तामन्वविन्दन्नृषिषु प्रविष्टाम्. तामाभृत्या व्यदधुः पुरुत्रा तां सप्त रेभा अभि सं नवन्ते.. (३) बुद्धिमान् मनुष्य यज्ञ के द्वारा भाषा का मार्ग जानते हैं. उन्होंने ऋषियों के मन में प्रविष्ट वाणी को जान लिया है. उस भाषा को प्राप्त करके उन्होंने अनेक देशों में फैलाया. सातों छंद इसी भाषा में एकत्र होते हैं. (३) उत त्वः पश्यन्न ददर्श वाचमुत त्वः शृण्वन्न शृणोत्येनाम्. उतो त्वस्मै तन्वं१ वि सस्रे जायेव पत्य उशती सुवासाः.. (४) कुछ लोग मन से विचार करके भी भाषा को नहीं समझ पाते. कुछ लोग भाषा को सुनकर भी नहीं सुनते. किसी किसी के सामने भाषा अपने शरीर को इस प्रकार विसर्जित कर देती है, जिस प्रकार शोभन वस्त्रों वाली एवं पति की कामना करने वाली नारी पति के सामने अपने शरीर को प्रदर्शित करती है. (४) उत त्वं सख्ते स्थिरपीतमाहुर्नैनं हिन्वन्त्यपि वाजिनेषु. अधेन्वा चरति माययैष वाचं शुश्रुवाँ अफलामपुष्पाम्.. (५) किसी-किसी को विद्वानों की मंडली में उत्तम भावग्रहण करने वाले के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त होती है. इनकी किसी भी कार्य में उपेक्षा नहीं की जाती. कुछ लोग फल और पुष्परहित वाणी की सेवा करते हैं. इनकी वाणी वास्तविक धेनु नहीं, अपितु मायारूपिणी धेनु है. (५) यस्तित्याज सचिविदं सखायं न तस्य वाच्यपि भागो अस्ति. ebook converter DEMO Watermarks*