ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1713, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसोम ने उस बालिका को गंधर्व को दिया. गंधर्व ने अग्नि को दिया. अग्नि ने यह मुझे पत्नी रूप में धन एवं पुत्रों सहित प्रदान की. (४१) इहैव स्तं मा वि यौष्टं विश्वमायुर्व्यश्नुतम्. क्रीळन्तौ पुत्रैर्नप्तृभिर्मोदमानौ स्वे गृहे.. (४२) हे वर और वधू! तुम दोनों यहीं रहो, एक-दूसरे से अलग मत होओ एवं पूरी अवस्था प्राप्त करो. तुम पुत्रों और नातियों के साथ खेलते हुए अपने घर में प्रसन्न रहो. (४२) आ नः प्रजां जनयतु प्रजापतिराजरसाय समनक्त्वर्यमा. अदुर्मङ्गलीः पतिलोकमा विश शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे.. (४३) प्रजापति हमें संतान दें एवं हमें बुढ़ापे तक साथ-साथ रखें. हे वधू! तुम अमंगलरहित होकर पति के घर में प्रवेश करो. तुम हमारे मानवों एवं पशुओं के लिए कल्याण कारक बनो. (४३) अघोरचक्षुरपतिघ्न्येधि शिवा पशुभ्यः सुमनाः सुवर्चाः. वीरसूर्देवकामा स्योना शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे.. (४४) तुम क्रोधरहित आंखों वाली होकर बढ़ो तथा पति का घात न करने वाली बनो. तुम पशुओं के लिए कल्याणकारिणी, शोभन मन युक्त एवं तेजपूर्ण बनो. तुम वीरजननी, देवों की भक्त एवं सुखकारिणी बनो तथा हमारे मानवों और पशुओं का कल्याण करो. (४४) इमां त्वमिन्द्र मीढ्वः सुपुत्रां सुभगां कृणु. दशास्यां पुत्राना धेहि पतिमेकादशं कृधि.. (४५) हे अभिलाषापूरक इंद्र! तुम इस वधू को शोभन पुत्रों-वाली एवं सौभाग्यशालिनी बनाओ. तुम इसमें मुझे दस पुत्रों को दो एवं मेरे पति को ग्यारहवां करो. (४५) सम्राज्ञी श्वशुरे भव सम्राज्ञी श्वश्र्वां भव. ननान्दरि सम्राज्ञी भव सम्राज्ञी अधि देवृषु.. (४६) हे वधू! तुम ससुर, सास, ननद और देवर के प्रति महारानी बनो. (४६) समञ्जन्तु विश्वे देवाः समापो हृदयानि नौ. सं मातरिश्वा सं धाता समु देष्ट्री दधातु नौ.. (४७) हे विश्वदेव! तुम हमारे हृदयों को आपस में मिलाओ. वायु, धाता और सरस्वती हमें मिलावें. (४७) ebook converter DEMO Watermarks*