भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

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पृष्ठ 1716

घसत्त इन्द्र उक्षणः प्रियं काचित्करं हविर्विश्वस्मादिन्द्र उत्तरः.. (१३) “हे वृषाकपि की पत्नी! तुम धनवाली, शोभनपुत्रयुक्त एवं शोभन पुत्रवधू हो. तुम्हारे बैल को इंद्र खा जावें एवं तुम्हारे सुखकर प्रिय हवि का भक्षण करें. इंद्र सबसे उत्तम हैं.” (१३) उक्षणो हि मे पञ्चदश साकं पचन्ति विंशतिम्. उताहमद्मि पीव इदुभा कुक्षी पृणन्ति मे विश्वस्मादिन्द्र उत्तरः.. (१४) इंद्राणी द्वारा प्रेरित याज्ञिक मेरे लिए पंद्रह या बीस बैल पकाते हैं. उन्हें खाकर मैं मोटा बनता हूं. याज्ञिक लोग मेरी दोनों कोखें सोमरस से भर देते हैं. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं. (१४) वृषभो न तिग्मशृङ्गोऽन्तर्यूथेषु रोरुवत्. मन्थस्त इन्द्र शं हृदे यं ते सुनोति भावयुर्विश्वस्मादिन्द्र उत्तरः.. (१५) इंद्राणी ने कहा—“हे इंद्र! तीखे सीगों वाला बैल जिस प्रकार गर्जन करता हुआ गायों में रमण करता है, उसी प्रकार तुम मेरे साथ रमण करो. दधिमंथन का शब्द तुम्हारे लिए कल्याणकारी हो. प्रेम की अभिलाषिणी इंद्राणी का सोमरस निचोड़ना तुम्हारा कल्याण करे. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं. (१५) न सेशे यस्य रम्बतेऽन्तरा सक्थ्या३ कपृत्. सेदीशे यस्य रोमशं निषेदुषो विजृम्भते विश्वस्मादिन्द्र उत्तरः.. (१६) “वह व्यक्ति मैथुन करने में समर्थ नहीं हो सकता जिसकी पुरुषेंद्रिय जांघों के बीच लटकती है. वह व्यक्ति मैथुन करने में समर्थ हो सकता है, जिसकी बालों से युक्त पुरुषेंद्रिय सोते समय विस्तृत होती है. इंद्र सबसे उत्तम हैं.” (१६) न सेशे यस्य रोमशं निषेदुषो विजृम्भते. सेदीशे यस्य रम्बतेऽन्तरा सक्थ्या३ कपृद्विश्वस्मादिन्द्र उत्तरः.. (१७) इंद्र ने कहा—“वह पुरुष मैथुन करने में समर्थ नहीं हो सकता जिसकी बालों वाली पुरुषेंद्रिय उसके सोते समय विस्तृत होती है, वही व्यक्ति मैथुन करने में समर्थ हो सकता है जिसकी पुरुषेंद्रिय जांघों के बीच में लटकती है. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं.” (१७) अयमिन्द्र वृषाकपिः परस्वन्तं हतं विदत्. असिं सूनां नवं चरुमाधेश्स्यान आचितं विश्वस्मादिन्द्र उत्तरः.. (१८) हे इंद्र! यह वृषाकपि पराए नष्ट धन को प्राप्त करे. वह तलवार वध का स्थल नया चरु एवं काठ की गाड़ी प्राप्त करे. इंद्र सबसे श्रेष्ठ हैं. (१८) ebook converter DEMO Watermarks*