भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1733, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1733

भूया अन्तरा हृद्यस्य निस्पृशे जायेव पत्य उशती सुवासाः.. (१३) प्राचीन एवं स्तुतियों की कामना करने वाले इस अग्नि के लिए मैं अत्यंत नवीन एवं शोभन स्तुतियां बोलता हूं. अग्नि उन्हें सुनें. जिस प्रकार पति की कामना करने वाली एवं शोभन वस्त्रों से युक्त नारी पति के हृदय से अपना शरीर मिलाती है, उसी प्रकार मैं अग्नि के मध्य भाग का स्पर्श करता हूं. (१३) यस्मिन्नश्वास ऋषभभास उक्षणो वशा मेषा अवसृष्टास आहुताः. कीलालपे सोमपृष्ठाय वेधसे हृदा मतिं जनये चारुमग्नये.. (१४) यज्ञ के समय जिस अग्नि में घोड़ों, बैलों, बिजारों, स्वभाव से बधिया मेढ़ों की आहुति दी जाती है, उस जलपान करने वाले, सोमयुक्त पीठ वाले व यज्ञविधाता अग्नि के लिए मैं हृदय से शोभन स्तुति बोलता हूं. (१४) अहाव्यग्ने हविरास्ये ते सुचीव घृतं चम्वीव सोमः. वाजसनिं रयिमस्मे सुवीरं प्रशस्तं धेहि यशसं बृहन्तम्.. (१५) हे अग्नि! मैं सुच में घृत एवं चमस में सोम के समान तुम्हारे मुख में हवि डालता हूं. तुम मुझे अन्न, धन, उत्तम यश सहित शोभन पुत्र दो. (१५) सूक्त—९२ देवता—नाना देव यज्ञस्य वो रथ्यं विश्पतिं विशां होतारमक्तोरतिथिं विभावसुम्. शोचञ्छुष्कासु हरिणीषु जर्भुरद्वृषा केतुर्यजतो द्यामशायत.. (१) हे देवो! तुम यज्ञ के नेता, मानव प्रजाओं के पालक, देवों का आह्वान करने वाले, रात के अतिथि एवं विविध दीप्ति वाले अग्नि की सेवा करो. सूखी लकड़ियों को जलाने एवं हरी लकड़ियों का भक्षण करने वाले अभिलाषापूरक यज्ञ के ज्ञापक एवं यजनीय अग्नि स्वर्ग में सोते हैं. (१) इममञ्जस्पामुभये अकृण्वत धर्माणमग्निं विदथस्य साधनम्. अक्तुं न यह्वमुषसः पुरोहितं तनूनपातमरुषस्य निंसते.. (२) देव और मानव दोनों ने शक्ति द्वारा रक्षण करने वाले व सबके धारक अग्नि को यज्ञ का साधन बनाया. वायु के पुत्र महान् और पुरोहित अग्नि को उषाएं सूर्य के समान चूमती हैं. (२) बळस्य नीथा वि पणेश्च मन्महे वया अस्य प्रहुता आसुरत्तवे. यदा घोरासो अमृतत्वमाशतादिज्जनस्य दैव्यस्य चर्किरन्.. (३) स्तुतियोग्य अग्नि के द्वारा बताए हुए ज्ञानों को हम सत्य मानते हैं. हमारी अन्न की ebook converter DEMO Watermarks*

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