भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1736, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1736

अभिलाषी व सर्वपालक इंद्र की स्तुति करते हैं। (१४) रेभदत्र जनुषा पूर्वो अङ्गिरा ग्रावाण ऊर्ध्वा अभि चक्षुरध्वरम्. येभिर्विहाया अभवद्विचक्षणः पाथः सुमेकं स्वधितिर्व्रन्वति.. (१५) प्राचीन अंगिरा ऋषि इस यज्ञ में देवों की स्तुति करते हैं. वे पत्थर ऊपर उठाकर यज्ञसाधन सोम को देखते हैं. विशेषदृष्टि वाले इंद्र पत्थरों के शब्द से महान हुए हैं. इंद्र के वज्र ने इस मार्ग में अन्नसाधन जल बरसाया. (१५) सूक्त—९३ देवता—विश्वेदेव महि द्यावापृथिवी भूतमूर्वी नारी यह्वी न रोदसी सदं नः. तेभिर्नः पातं सह्यस एभिर्नः पातं शूषणि.. (१) हे द्यावा-पृथिवी! तुम महान् बनो. तुम विस्तीर्ण बनो और नारी के समान हमारे घर में स्थित होओ. तुम अपने रक्षासाधनों से हमें शत्रुओं से बचाओ. तुम अपने इन कार्यों से हमें शत्रुओं से बचाओ. (१) यज्ञेयज्ञे स मर्त्यो देवान्त्सपर्यति. यः सुम्नैर्दीर्घश्रुत्तम आविवासात्येनान्.. (२) वह मनुष्यों के सभी यज्ञों में देवों की सेवा करता है एवं यजमान अनेक शास्त्रों को सुनकर सुखकारी हव्यों से देवों की परिचर्या करता है. (२) विश्वेषामिरज्यवो देवानां वार्महः. विश्वे हि विश्वमहसो विश्वे यज्ञेषु यज्ञियाः.. (३) हे सकल भुवनों के स्वामी देवो! तुम्हारा वरणीय धन महान् है. तुम सब व्याप्त तेज वाले एवं यज्ञों के अधिकारी हो. (३) ते घा राजानो अमृतस्य मन्द्रा अर्यमा मित्रो वरुणः परिज्मा. कद्रुद्रो नृणां स्तुतो मरुतः पूषणो भगः.. (४) अर्यमा, मित्र, सर्वत्रगामी वरुण अन्य देवों के ऋत्विजों द्वारा प्रशंसित रुद्र, पूषा, मरुत् एवं भग अमृत सदृश हवि के स्वामी, सबके स्तुतियोग्य एवं मानवों को सुख देने वाले हैं. (४) उत नो नक्तमपां वृषण्वसू सूर्यामासा सदनाय सधन्या. सचा यत्साद्येषामहिर्बुध्न्येषु बुध्यः.. (५) हे अश्विनीकुमारो एवं समान धन वाले सूर्यचंद्र! अंतरिक्ष में स्थित मेघों में जो अहिर्बुध्न्य स्थित हैं, उनके साथ जल बरसाओ. (५) ebook converter DEMO Watermarks*