भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 174, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 174

हे अग्नि! इन समस्त देवों के साथ सोमरस पीने, हमारी सेवा तथा स्तुति ग्रहण करने के लिए पधारो एवं हमारा यज्ञ पूरा करो. (१) आ त्वा कण्वा अहूषत गृणन्ति विप्र ते धियः. देवेभिरग्न आ गहि.. (२) हे विद्वान् अग्नि! कण्व की संतान तुम्हें बुलाती है एवं तुम्हारे कर्मों की प्रशंसा करती है. तुम देवों के साथ आओ. (२) इन्द्रवायू बृहस्पतिं मित्राग्निं पूषणं भगम्. आदित्यान् मारुतं गणम्.. (३) हे स्तोताओ! इंद्र, वायु, बृहस्पति, मित्र, अग्नि, पूषा, भग, आदित्यों एवं मरुद्गणों का आह्वान करो. (३) प्र वो भ्रियन्त इन्दवो मत्सरा मादयिष्णवः. द्रप्सा मध्वश्चमूषदः.. (४) हे देवो! तृप्तिकारक, प्रसन्नतादायक, मादक एवं बिंदु रूप सोमरस पात्रों में रखा है. (४) ईळते त्वामवस्यवः कण्वासो वृक्तबर्हिषः. हविष्मन्तो अरङ्कृतः.. (५) हे अग्नि! अलंकृत कण्ववंशी हव्ययुक्त होकर एवं कुश बिछाकर तुम्हें बुलाते हैं एवं रक्षा की याचना करते हैं. (५) घृतपृष्ठा मनोयुजो ये त्वा वहन्ति वह्नयः. आ देवान्त्सोमपीतये.. (६) हे अग्नि! तुम्हारी इच्छा मात्र से रथ में जुड़ जाने वाले जो तेजस्वी घोड़े तुम्हें ढोते हैं, उन्हीं से देवों को सोम पीने के लिए यहां लाओ. (६) तान् यजत्राँ ऋतावृधो ऽग्ने पत्नीवतस्कृधि. मध्वः सुजिह्व पायय.. (७) हे अग्नि! उन पूजनीय एवं यज्ञवर्धक देवों को पत्नी वाला करो. हे सुजिह्व! उन्हें सोम पिलाओ. (७) ये यजत्रा य ईड्यास्ते ते पिबन्तु जिह्वया. मधोरग्ने वषट्कृति.. (८) हे अग्नि! पूजनीय एवं स्तुतिपात्र देव वषट्कार का उच्चारण होते समय तुम्हारी जीभ से सोमरस पिएं. (८) आकीं सूर्यस्य रोचनाद् विश्वान् देवाँ उषर्बुधः. विप्रो होतेह वक्षति.. (९) मेधावी एवं देवों के आह्वान करने वाले अग्नि प्रातःकाल जागने वाले देवों को प्रकाशित सूर्य-मंडल से यहां यज्ञ में लावें. (९) विश्वेभिः सोम्यं मध्वग्न इन्द्रेण वायुना. पिबा मित्रस्य धामभिः.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*