ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1758, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंतुम्हारा ध्यान यज्ञयोग्य, दीप्त एवं पूज्य है. जिस प्रकार गाएं घास खाकर हजार धारों वाला दूध देती हैं, उसी प्रकार यह ध्यान हमारी इच्छा पूरी करे. (९) आ तू षिञ्च हरिमीं द्रोरुपस्थे वाशीभिस्तक्षताश्मन्मयीभिः. परि ष्वजध्वं दश कक्ष्याभिरुभे धुरौ प्रति वह्निं युनक्त.. (१०) हे अध्वर्युजनो! तुम काठ के बरतन में रखे हुए हरे रंग के सोमरस को सींचो. पत्थर की टंकियों से यह पात्र बनाओ. दस उंगलियां लपेटकर इस पात्र को पकड़ो तथा रथ के दोनों धुरों में बैल जोड़ो (१०) उभे धुरौ वह्निरापिब्दमानोऽन्तर्योनेव चरति द्विजानिः. वनस्पतिं वन आस्थापयध्वं नि षू दधिध्वमखनन्त उत्सम्.. (११) रथ को ढोने वाला बैल रथ की दोनों धुरों को शब्दपूर्ण करता हुआ इस प्रकार चलता है, जिस प्रकार दो पत्नियों का पति उनके साथ क्रम से क्रीड़ा करता है. लकड़ी के बने ढांचे को लकड़ी के पहियों पर इस प्रकार रखो कि रथ का ढांचा निराधार न रहे. (११) कपुन्नरः कपथमुद्दधातन चोदयत खुदत वाजसातये. निष्टिग्र्यः पुत्रमा च्यावयोतय इन्द्रं सबाध इह सोमपीतये.. (१२) हे ऋत्विजो! ये इंद्र सुख को पूरा करने वाले हैं. उन्हें प्रेरित करो, उनके साथ क्रीड़ा करो एवं सुख उठाओ. तुम अन्न पाने के लिए ऐसा करो. हे बाधा वाले ऋत्विजो! अदितिपुत्र इंद्र को अपनी रक्षा के उद्देश्य से सोमरस पीने के लिए बुलाओ. (१२) सूक्त—१०२ देवता—इंद्र प्र ते रथं मिथूकृतमिन्द्रोऽवतु धृष्णुया. अस्मिन्नाजौ पुरुहूत श्रवाय्ये धनभक्षेषु नोऽव.. (१) हे मुद्गल! युद्ध में असहाय बने हुए तुम्हारे रथ की शक्तिशाली इंद्र रक्षा करें. हे बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र! इस प्रसिद्ध युद्ध में धन की कामना करने वाले हम लोगों की रक्षा करो. (१) उत्स्म वातो वहति वासो अस्या अधिरथं यदजयत्सहस्रम्. रथीरभून्मुद्गलानी गविष्टौ भरे कृतं व्यचेदिन्द्रसेना.. (२) मुद्गलानी ने जिस समय रथ पर बैठकर हमारी गायों को जीता, उसी समय वायु ने उसका वस्त्र हिलाया. गायों के जीतने वाले इस युद्ध में वह रथ पर बैठी थी. इंद्रसेना नाम की वह मुद्गलपत्नी युद्ध में शत्रुओं से गाएं छीन लाई. (२) ebook converter DEMO Watermarks*