ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1764, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंसप्तापो देवीः सुरणा अमृक्ता याभिः सिन्धुमतरा इन्द्र पूर्षित्. नवतिं स्रोत्या नव च स्रवन्तीर्देवेभ्यो गातुं मनुषे च विन्दः.. (८) हे शत्रुनगरियों का भेदन करने वाले इंद्र! तुमने शोभन-शब्द वाली एवं बाधारहित गंगा आदि सात नदियों द्वारा सागर को बढ़ाया, तुमने देवों और मानवों के कल्याण के लिए निन्यानवे नदियों को मार्ग प्राप्त कराया. (८) अपो महीरभिशस्तेरमुञ्चोऽजागरास्वधि देव एकः. इन्द्र यास्त्वं वृत्रतूर्ये चकर्थ ताभिर्विश्वायुस्तन्वं पुपुष्याः.. (९) हे इंद्र! तुमने वृत्र के पास से बहुत जल गिराया. इन मुक्त जलों के प्रति एकमात्र तुम्हीं सावधान थे. तुमने वृत्र को मारकर प्राप्त किए गए जलों से सारे संसार के प्राणियों का शरीर पुष्ट किया था. (९) वीरेण्यः क्रतुरिन्द्रः सुशस्तिरुतापि धेना पुरुहूतमीट्टे. आर्दयद्वृत्रमकृणोदु लोकं ससाहे शक्रः पृतना अभिष्टिः.. (१०) इंद्र अतिशय वीर, यज्ञकर्मों वाले एवं शोभन स्तुतियुक्त हैं. मेरी वाणी इंद्र की स्तुति करती है. इंद्र ने वृत्र को मारा, प्रकाश किया, शक्तिशाली बनकर शत्रु को हराया एवं शत्रुओं की सेनाओं को समाप्त किया. (१०) शुनं हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ. शृण्वन्तमूग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि सञ्जितं धनानाम्.. (११) हे इंद्र! अन्नप्राप्ति वाले युद्ध में मैं उत्साह से बढ़े हुए एवं धनस्वामी तुम्हें बुलाता हूं. तुम यज्ञ के कुशल नेता हो. तुम युद्धों में अपने सेवकों की रक्षा के लिए भयानक रूप धारण करते हो, शत्रुओं को मारते एवं उनका धन जीतते हो. (११) सूक्त—१०५ देवता—इंद्र कदा वसो स्तोत्रं हर्यत आव श्मशा रुधद्द्वाः. दीर्घं सुतं वाताप्याय.. (१) हे निवासस्थान देने वाले इंद्र! हमारा स्तोत्र तुझ कामना करने वाले को कब रोकेगा? जिस प्रकार खेत की नालियां जलपूर्ण होती हैं. उसी प्रकार जल प्राप्त करने के लिए अधिक सोमरस निचोड़ा गया है. (१) हरी यस्य सुयुजा विव्रता वेरर्वन्तानु शेपा. उभा रजी न केशिना पतिर्दन्.. (२) हरि नामक दो घोड़े दौड़ने में कुशल ठीक-ठीक से सिखाए गए एवं श्वेत केशों वाले हैं. इन घोड़ों के स्वामी इंद्र दान करने आवें. (२) ebook converter DEMO Watermarks*