भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1781, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1781

धारण करने वाली है. उस पर हव्यदाता यजमान एवं पुरोहितरूपी दो पक्षी बैठते हैं एवं देवगण अपना भाग प्राप्त करते हैं. (३) एकः सुपर्णः स समुद्रमा विवेश स इदं विश्वं भुवनं वि चष्टे. तं पाकेन मनसापश्यमन्तितस्तं माता रेळ्हि स उ रेळ्हि मातरम्.. (४) प्राणवायुरूपी पक्षी ब्रह्मांडरूपी सागर में घुसा. वह सारे संसार को देखता है. मैंने परिपक्व मन से उसे देखा है. उसे माता चाटती है और वह माता को चाटता है. (४) सुपर्णं विप्राः कवयो वचोभिरेकं सन्तं बहुधा कल्पयन्ति. छन्दांसि च दधतो अध्वरेषु ग्रहान्त्सोमस्य मिमते द्वादश.. (५) क्रांतदर्शी विद्वान् परमात्मारूपी एक ही पक्षी को अनेक प्रकार के वचनों से वर्णित करते हैं. वे यज्ञों में भांति-भांति के छंदों की रचना करते हैं तथा सोमरस के बारह पात्रों को स्थापित करते हैं. (५) षट्त्रिंशाँश्च चतुरः कल्पयन्तश्छन्दांसि च दधत आद्वादशम्. यज्ञं विमाय कवयो मनीष ऋक्सामाभ्यां प्र रथं वर्तयन्ति.. (६) विद्वान् ब्राह्मण चालीस छंदों की कल्पना करते हुए बारह सोमपात्रों की स्थापना करते हैं. वे विद्वान् अपनी बुद्धि से यज्ञ को पूरा करके ऋक् एवं सोम मंत्रों की सहायता से अपना यज्ञरूपी रथ चलाते हैं. (६) चतुर्दशान्ये महिमानो अस्य तं धीरा वाचा प्र णयन्ति सप्त. आप्रानं तीर्थं क इह प्र वोचद्येन पथा प्रपिबन्ते सुतस्य.. (७) इस यज्ञरूपी परमात्मा की चौदह विभूतियां हैं. सात होता आदि धीर पुरुष मंत्रों द्वारा उसे पूरा करते हैं. जिस यज्ञमार्ग से चलकर देवगण सोमरस पीते हैं, उस विश्वव्याप्त ईश्वररूपी यज्ञ का वर्णन कौन कर सकता है? (७) सहस्रधा पञ्चदशान्युक़्था यावद् द्यावापृथिवी तावदित्तत्. सहस्रधा महिमानः सहस्रं यावद् ब्रह्म विष्ठितं तावती वाक्.. (८) पंद्रह हजार उक्थमंत्र द्यावा-पृथिवी के समान ही विस्तृत हैं. हमारे स्तोत्रों की महिमा हजारों प्रकार की है. स्तोत्रों के समान वाणी भी असीम है. (८) कश्छन्दसां योगमा वेद धीरः को धिष्ण्यां प्रति वाचं पपाद. कमृत्विजामष्टमं शूरमाहुर्हरी इन्द्रस्य नि चिकाय कः स्वित्.. (९) कौन विद्वान् छंदों का प्रयोग जानता है? होता आदि सात स्थानों के योग्यवाणी का ebook converter DEMO Watermarks*