ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1805, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमनुष्यों ने यज्ञ की कल्पना की. (५) चाक्लृप्रे तेन ऋषयो मनुष्या यज्ञे जाते पितरो नः पुराणे. पश्यन्मन्ये मनसा चक्षसा तान् य इमं यज्ञमयजन्त पूर्वे.. (६) यज्ञ के उत्पन्न होने पर हमारे प्राचीन पितरों अर्थात् ऋषियों और मनुष्यों ने उक्त छंदों की सहायता से यज्ञ पूर्ण किया. जिन पूर्व पुरुषों ने इस यज्ञ को पूर्ण किया था, उन्हें मैं मन की आंखों से देख रहा हूं. मैं ऐसा मानता हूं. (६) सहस्तोमाः सहछन्दस आवृतः सहप्रमा ऋषयः सप्त दैव्याः. पूर्वेषां पन्थामनुदृश्य धीरा अन्वालेभिरे रथ्यो३ न रश्मीन्.. (७) सात दिव्य ऋषियों ने यज्ञ के मंत्र, छंद एवं नियम एक साथ जानकर यज्ञ का अनुष्ठान किया. जिस प्रकार सारथि घोड़ों की लगाम पकड़ता है, उसी प्रकार धीर ऋषियों ने प्राचीन लोगों के मार्ग का अनुसरण किया. (७) सूक्त—१३१ देवता—अश्विनीकुमार व इंद्र अप प्राच इन्द्र विश्वाँ अमित्रानपाचो अभिभूते नुदस्व. अपोदीचो अप शूराधराच उरौ यथा तव शर्मन्मदेम.. (१) हे शत्रुपराभवकारी इंद्र! हमारे सामने, पीछे, उत्तर और दक्षिण में जो शत्रु हैं, उन्हें समाप्त करो. हे शूर इंद्र! तुम्हारे पास विशेष सुख पाकर हम प्रसन्न हों. (१) कुविद्वङ्ग यवमन्तो यवं चिद्यथा दान्त्यनुपूर्वं वियूय. इहेहैषां कृणुहि भोजनानि ये बर्हिषो नमोवृक्तिं न जग्मुः.. (२) हे इंद्र! जौ के खेत के मालिक जिस प्रकार उसे क्रमशः अनेक बार में काटते हैं, उसी प्रकार उन लोगों की भोजन सामग्री नष्ट करो जो ‘नमः’ शब्द का उच्चारण नहीं करते एवं यज्ञ का अनुष्ठान नहीं करते. (२) नहि स्थूर्युतुथा यातमस्ति नोत श्रवो विवदे सङ्गमेषु. गव्यन्त इन्द्रं सख्याय विप्रा अश्वायन्तो वृषणं वाजयन्तः.. (३) एक पहिए वाली गाड़ी उचित समय पर कहीं नहीं पहुंच सकती. उससे युद्ध के समय भी अन्न नहीं मिल सकता. गौ, अश्व एवं अन्न की अभिलाषा करने वाले लोग इंद्र की मित्रता चाहते हैं. (३) युवं सुराममश्विना नमुचावासुरे सचा. विपिपाना शुभस्पती इन्द्रं कर्मस्वावतम्.. (४) ebook converter DEMO Watermarks*