भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1821, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1821

वाचकरहित, लाल रंग का एवं यज्ञ द्वारा अन्न को उत्पन्न करने वाला है. सोम के लिए अन्न एवं जीवनयोग्य आयु दो एवं इसके साथ मित्रता करो. (५) एवा तदिन्द्र इन्दुना देवेषु चिद्धारयाते महि त्यजः. क्रत्वा वयो वि तार्यायुः सुक्रतो क्रत्वायमस्मदा सुतः.. (६) इंद्र इस सोमरस को पीकर हमारी तथा देवों की विशेष रक्षा करते हैं. हे शोभन कर्म वाले इंद्र! हमें यज्ञ करने के लिए अन्न एवं परम आयु दो. यह सोमरस हमने यज्ञ के लिए निचोड़ा है. (६) सूक्त—१४५ देवता—सौत की पीड़ा इमां खनाम्योषधिं वीरुधं बलवत्तमाम्. यया सपत्नीं बाधते यया संविन्दते पतिम्.. (१) मैं इस परम शक्तिशाली एवं लतारूपिणी ओषधि को खोदती हूं. इसके द्वारा सौत को कष्ट पहुंचाकर पति का प्रेम पाया जाता है. (१) उत्तानपर्णे सुभगे देवजूते सहस्वति. सपत्नीं मे परा धम पतिं मे केवलं कुरु.. (२) हे ऊपर की ओर पत्तों वाली, सौभाग्य का कारण, देवों द्वारा प्रेरित एवं पति को वश में करने वाली ओषधि! तुम मेरी सौत को दूर हटाकर मेरे पति को केवल मेरा बनाओ. (२) उत्तराहमुत्तर उत्तरेदुत्तराभ्यः. अथा सपत्नी या ममाधरा साधराभ्यः.. (३) हे उत्तम ओषधि! मैं अपने पति की प्रधान नारियों में भी प्रधान बनूं. मेरी सौत निम्न से भी निम्न स्थान प्राप्त करे. (३) नह्यस्या नाम गृभ्णामि नो अस्मिन्नमते जने. परामेव परावतं सपत्नीं गमयामसि.. (४) मैं अपनी सौत का नाम तक नहीं लेती. सौत को कोई भी पंसद नहीं करता. मैं अपनी सौत को बहुत दूर स्थान पर भेजती हूं. (४) अहमस्मि सहमानाथ त्वमसि सासहिः. उभे सहस्वती भूत्वी सपत्नीं मे सहावहै.. (५) हे ओषधि! मैं तुम्हारी कृपा से अपनी सौत को पराजित करूंगी. इस प्रकार तुम भी पराजित करने वाली हो. हम और तुम दोनों शक्तिशाली बनकर सौत को शक्तिहीन करें. (५) eBook converter DEMO Watermarks*