भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 188, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 188

यद्द्राहमभिदुद्रोह यद्वा शेप उतानृतम्.. (२२) मेरे भीतर जो कुछ बुराइयां हैं, मैंने दूसरों के साथ जो द्रोह किया है, दूसरों को जो दुर्वचन कहे हैं या जो असत्य भाषण किया है, हे जल! उन सबको धो डालो. (२२) आपो अद्यान्वचारिषं रसेन समगस्महि. पयस्वानग्न आ गहि तं मा सं सृज वर्चसा.. (२३) मैं आज स्नान के लिए जल में प्रवेश करता हूं. मैं आज जल के रस से मिल गया हूं. हे जल में निवास करने वाली अग्नि! आओ और मुझे अपने तेज से भर दो. (२३) सं माग्ने वर्चसा सृज सं प्रजया समायुषा. विद्युर्मे अस्य देवा इन्द्रो विद्यात्सह ऋषिभिः.. (२४) हे अग्नि! मुझे तेज, संतान और आयु दो, जिससे देवगण, इंद्र और ऋषि-समूह मेरे यज्ञ को जान सकें. (२४) सूक्त—२४ देवता—अग्नि आदि कस्य नूनं कतमस्यामृतानां मनामहे चारु देवस्य नाम. को नो मह्या अदितये पुनर्दात्पितरं च दृशेयं मातरं च.. (१) मैं देवताओं में से किस श्रेणी के किस देवता का सुंदर नाम पुकारूं? कौन देवता मुझ मरने वाले को विशाल धरती पर रहने देगा? जिससे मैं अपने माता-पिता को देख सकूं? (१) अग्नेर्वयं प्रथमस्यामृतानां मनामहे चारु देवस्य नाम. स नो मह्या अदितये पुनर्दात्पितरं च दृशेयं मातरं च.. (२) मैं देवताओं में सबसे पहले अग्नि का नाम पुकारता हूं. वे मुझे इस विशाल धरती पर रहने देंगे, जिससे मैं अपने माता-पिता को देख सकूं. (२) अभि त्वा देव सवितरीशानं वार्याणाम् सदावन्भागमीमहे.. (३) हे सदा रक्षा करने वाले सूर्य देव! तुम उत्तम धन के स्वामी हो, इसलिए मैं तुमसे उपभोग करने योग्य धन मांगता हूं. (३) यश्चिद्धि त इत्था भगः शशमानः पुरा निदः. अद्वेषो हस्तयोर्दधे.. (४) हे सूर्य! तुम अपने दोनों हाथों में उपभोग के योग्य धन को धारण करते हो. वह सबके द्वारा प्रशंसित है. उससे कोई द्वेष नहीं रखता. (४) ebook converter DEMO Watermarks*

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