भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 201, कुल 1855 में से

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दाता हैं. उन्हीं ने हमें सोने का रथ दिया है. (१६) आश्विनावश्वावत्येषा यातं शवीरया. गोमद्दस्रा हिरण्यवत्.. (१७) हे अश्विनीकुमारो! तुम बहुत से घोड़ों द्वारा ढोया हुआ अन्न लेकर आओ. हे शत्रुनाशक! हमारा घर बहुत सी गायों और सोने से भरा हो. (१७) समानयोजनो हि वां रथो दस्रावमर्त्यः. समुद्रे अश्विनयेते.. (१८) हे शत्रुनाशक अश्विनीकुमारो! तुम दोनों के लिए एक ही अविनाशी रथ तैयार किया गया है. वह रथ समुद्र और आकाश में भी चल सकता है. (१८) न्य१घ्न्यस्य मूर्धनि चक्रं रथस्य येमथुः. परि द्यामन्यदीयते.. (१९) हे अश्विनीकुमारो! तुमने शत्रुओं का विनाश करने के लिए अपने रथ का एक पहिया स्थिर पर्वत के ऊपर जमाया है और दूसरा आकाश में चारों ओर घूम रहा है. (१९) कस्त उषः कधप्रिये भुजे मर्तो अमर्त्ये. कं नक्षसे विभावरि.. (२०) हे अमर उषा! तुम्हें स्तुति बहुत प्यारी लगती है. कोई भी मनुष्य तुम्हारा उपभोग करने में समर्थ नहीं है. हे विशेष प्रभावशालिनी! तुम किस पुरुष को प्राप्त होगी? (२०) वयं हि ते अमन्मह्याऽन्तादा पराकात्. अश्वे न चित्रे अरुषि.. (२१) हे विस्तृत एवं रंगबिरंगे प्रकाश वाली उषा! हम तुम्हें न दूर से समझ सकते हैं और न पास से. (२१) त्वं त्योभिरा गहि वाजेभिर्दुहितर्दिवः. अस्मे रयिं नि धारय.. (२२) हे आकाश की पुत्री उषा! तुम प्रसिद्ध अन्नों के साथ आओ और हमें धन दो. (२२) सूक्त—३१ देवता—अग्नि त्वमग्ने प्रथमो अङ्गिरा ऋषिर्देवो देवानामभवः शिवः सखा. तव व्रते कवयो विद्मनापसोऽजायन्त मरुतो भ्राजदृष्टयः.. (१) हे अग्नि! तुम अंगिरा गोत्र वाले ऋषियों के आदि ऋषि थे. तुम स्वयं देव थे एवं अन्य देवों के कल्याणकारक मित्र थे. तुम्हारे कर्म के कारण ही मरुद्गणों ने जन्म लिया जो अपना कर्म जानते हैं और जिनके शस्त्र चमकीले हैं. (१) त्वमग्ने प्रथमो अङ्गिरस्तमः कविर्देवानां परि भूषसि व्रतम्. ebook converter DEMO Watermarks*