भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 207, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 207

दासपत्नीरहिगोपा अतिष्ठन्निरुद्धा आपः पणिनेव गावः. अपां बिलमपिहितं यदासीद् वृत्रं जघन्वाँ अप तद्ववार.. (११) जिस प्रकार पणि नामक असुर ने गायों को गुफा में बंद कर दिया था, उसी प्रकार वृत्र द्वारा रक्षित उसकी जल रूपी पत्नियां भी निरुद्ध थीं. जल बहने का मार्ग भी रुका हुआ था. इंद्र ने वृत्र को मारकर वह द्वार खोला. (११) अश्व्यो वारो अभवस्तदिन्द्र सृके यत्त्वा प्रत्यहन्देव एकः. अजयो गा अजयः शूर सोममवासृजः सर्तवे सप्त सिन्धून्.. (१२) हे इंद्र! सभी आयुधों के प्रहार में अद्वितीय वृत्र ने जब तुम्हारे वज्र के ऊपर प्रहार किया था, उस समय तुम घोड़े की पूंछ के समान घूम कर उसे बचा गए थे. हे शूर! तुमने पणि द्वारा पर्वत गुफा में छिपाई हुई गायों को जीता तथा सोम को भी जीत लिया. तुमने सात नदियों का प्रवाह बाधाहीन कर दिया. (१२) नास्मै विद्युन्न तन्यतुः सिषेध न यां मिहमकिरद्धादुनिं च. इन्द्रश्च यद्युयुधाते अहिश्चोतापरीभ्यो मघवा वि जिग्ये.. (१३) जिस समय इंद्र और वृत्र परस्पर युद्ध कर रहे थे, उस समय वृत्र ने माया से जिस बिजली, मेघगर्जन, जलवर्षा और अशनि का प्रयोग किया था, वे इंद्र को नहीं रोक सके. इसके साथ ही इंद्र ने वृत्र की अन्य मायाओं को भी जीत लिया. (१३) अहेर्यातारं कमपश्य इन्द्र हृदि यत्ते जघ्नुषो भीरगच्छत्. नव च यन्नवतिं च स्रवन्तीः श्येनो न भीतो अतरो रजांसि.. (१४) हे इंद्र! वृत्र को मारते समय तुम्हारे मन में कोई भी भय नहीं हुआ. उस समय तुमने सहायक रूप में किसी भी वृत्रहंता को नहीं देखा था. तुम निडर बाज पक्षी के समान शीघ्रता से निन्यानवे नदियों को पार कर गए थे. (१४) इन्द्रो यातोऽवसितस्य राजा शमस्य च शृङ्गिणो वज्रबाहुः. सेदु राजा क्षयति चर्षणीनामरान्न नेमिः परि ता बभूव.. (१५) वृत्र को मारकर वज्रधारी इंद्र स्थावर, जंगम, सींग रहित और सींग वाले पशुओं के स्वामी बने. इंद्र मनुष्यों के भी राजा बने. जिस प्रकार पहिए के अरे नेमि में स्थित रहते हैं, उसी प्रकार इंद्र ने सबको धारण किया. (१५) सूक्त—३३ देवता—इंद्र एतायामोप गव्यन्त इन्द्रमस्माकं सु प्रमतिं वावृधाति. ebook converter DEMO Watermarks*

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