भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 239, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 239

(१६) सूक्त—४९ देवता—उषा उषो भद्रेभिरा गहि दिवश्चिद्रोचनादधि. वहन्त्वरुणप्सव उप त्वा सोमिनो गृहम्.. (१) हे उषा! प्रकाशमान आकाश से सुंदर मार्ग द्वारा आओ. लाल रंग की गाय तुम्हें सोमयुक्त यजमान के यज्ञ में ले जाए. (१) सुपेशसं सुखं रथं यमध्यस्था उषस्त्वम्. तेना सुश्रवसं जनं प्रावाद्य दुहितर्दिव:.. (२) हे उषा! तुम जिस सुंदर एवं विस्तृत रथ पर बैठती हो, हे स्वर्गपुत्री! उसी रथ से आज हव्यदाता यजमान के पास आओ. (२) वयश्चित्ते पतत्रिणो द्विपच्चतुष्पदार्जुन. उष: प्रारन्नृतूँरनु दिवो अन्तेभ्यस्परि.. (३) हे शुभ्र वर्ण वाली उषा! तुम्हारा आगमन देखकर दो पैरों वाले मनुष्य, चार पैरों वाले पशु एवं पंखों वाले पक्षी अपने-अपने व्यापार में लग जाते हैं. (३) व्युच्छन्ती हि रश्मिभिर्विश्वमाभासि रोचनम्. तां त्वामुषर्वसूयवो गीर्भि: कण्वा अहूषत.. (४) हे उषा! तुम अंधकार का नाश करती हुई अपने तेज से सारे जगत् को प्रकाशित करो. धन चाहने वाले कण्वपुत्रों ने स्तुति वचनों से तुम्हारी प्रशंसा की है. (४) सूक्त—५० देवता—सूर्य उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः. दृशे विश्वाय सूर्यम्.. (१) सूर्य के घोड़े सब प्राणियों को जानने वाले हैं, वे प्रकाशयुक्त सूर्य को इसलिए ऊपर ले जाते हैं कि सारा संसार उन्हें देख सके. (१) अप त्ये तायवो यथा नक्षत्रा यन्त्यक्तुभिः. सूराय विश्वचक्षसे.. (२) सबको प्रकाशित करने वाले सूर्य का आगमन देखकर नक्षत्र रात्रिसहित इस प्रकार भाग जाते हैं, जिस प्रकार चोर भागते हैं. (२) eBook converter DEMO Watermarks*