ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 323, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंस मन्युमीः समदनस्य कर्तास्माकेभिर्नृभिः सूर्यं सनत्. अस्मिन्नहन्सत्पतिः पुरुहूतो मरुत्वान्नो भवत्विन्द्र ऊती.. (६) शत्रुहिंसक, संग्रामकर्त्ता, सज्जनों के पालक एवं अनेक यजमानों द्वारा बुलाए गए इंद्र आज के दिन हमें सूर्य के प्रकाश का उपभोग करने दें एवं मरुतों के सहयोग से हमारे रक्षक बनें. (६) तमूतयो रणयञ्छूरसातौ तं क्षेमस्य क्षितयः कृण्वत त्राम्. स विश्वस्य करुणस्येश एको मरुत्वान्नो भवत्विन्द्र ऊती.. (७) वीर पुरुषों द्वारा लड़े गए संग्राम में मरुत् शब्द द्वारा जिस इंद्र को प्रसन्न करते हैं एवं मनुष्य जिसे रक्षणीय धन का रखवाला बनाते हैं, वे अभिमत फल देने में एकमात्र समर्थ इंद्र मरुतों की सहायता से हमारे रक्षक बनें. (७) तमप्सन्त शवस उत्सवेषु नरो नरमवसे तं धनाय. सो अन्धे चित्तमसि ज्योतिर्विन्दन्मरुत्वान्नो भवत्विन्द्र ऊती.. (८) स्तोता लोग संग्रामों में रक्षा एवं धन पाने के उद्देश्य से इंद्र की शरण में जाते हैं, क्योंकि वे युद्ध में विजयरूपी प्रकाश देते हैं. वे इंद्र मरुतों के सहयोग से हमारे रक्षक बनें. (८) स सव्येन यमति व्राधतश्चित्स दक्षिणे संगृभीता कृतानि. स कीरिणा चित्सनिता धनानि मरुत्वान्नो भवत्विन्द्र ऊती.. (९) इंद्र बाएं हाथ से शत्रुओं को रोकते हैं, दाएं हाथ से यजमानों द्वारा दिया हुआ हव्य स्वीकार करते हैं एवं स्तोता की स्तुति सुनकर धन देते हैं. वे मरुतों के सहयोग से हमारे रक्षक बनें. (९) स ग्रामेभिः सनिता स रथेभिर्विदे विश्वाभिः कृष्टिभिर्न्व१द्य. स पौंस्येभिरभिभूरशस्तीर्मरुत्वान्नो भवत्विन्द्र ऊती.. (१०) जो इंद्र मरुतों के साथ धन देते हैं, वे आज अपने रथ के कारण सभी मनुष्यों द्वारा पहचाने जा रहे हैं एवं जिन्होंने अपने बलों से शत्रुओं को पराजित किया है, वे मरुतों के सहयोग से हमारे रक्षक बनें. (१०) स जामिभिर्यत्समजाति मीळ्हेऽजामिभिर्वा पुरुहूत एवैः. अपां तोकस्य तनयस्य जेषे मरुत्वान्नो भवत्विन्द्र ऊती.. (११) जो इंद्र बहुत से यजमानों द्वारा बुलाए जाने पर अपने बांधवों एवं बांधवहीन मानवों के साथ युद्धक्षेत्र में सम्मिलित होते हैं और दोनों प्रकार के शरणागत लोगों एवं उनके पुत्र-पौत्रों को विजय दिलाते हैं, वे मरुतों के सहयोग से हमारे रक्षक बनें. (११) ebook converter DEMO Watermarks*