भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 393, कुल 1855 में से

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यजमानों के सुख के निमित्त युद्ध में सिंहनाद करते हो. यजमान भांति-भांति की भोग्य वस्तुएं एवं विजय के द्वारा अन्न प्राप्त करने की इच्छा से तुम्हारे समीप जाते हैं. (५) उतो नो अस्या उषसो जुषेत ह्यार्कस्य बोधि हविषो हवीमभिः स्वर्षाता हवीमभिः. यदिन्द्र हन्तवे मृधो वृषा वज्रिञ्जिकेतसि. आ मे अस्य वेधसो नवीयसो मन्म श्रुधि नवीयसः.. (६) क्या इंद्र हमारे प्रातःकालीन यज्ञों में सम्मिलित होंगे? हे इंद्र! हवि देने के लिए स्वर्ग प्रदाता यज्ञों में हमारे द्वारा बुलाए जाने पर आओ और हवि स्वीकार करो. हे वज्रधारी! हिंसक शत्रुओं के नाश के लिए हमारे इच्छापूरक बनकर आओ एवं मुझ मेधावी, नवीन एवं असाधारण स्तुति वाले के उत्तम स्तोत्र सुनो. (६) त्वं तमिन्द्र वावृधानो अस्मयुरमित्रयन्तं तुविजात मर्त्यं वज्रेण शूर मर्त्यम्. जहि यो नो अघायति शृणुष्व सुश्रवस्तमः. रिष्टं न यामन्नप भूतु दुर्मतिर्विश्वाप भूतु दुर्मतिः.. (७) हे इंद्र! तुम शूर, अनेक गुण युक्त एवं हमारी स्तुति के कारण उन्नत हो. तुम हमें चाहते हो. जो लोग हमारे प्रति शत्रुता रखते एवं हमें दुःख देते हैं, अपने वज्र द्वारा तुम उनका विनाश करो. हे सुंदर कानों वाले! हमारी बात सुनो. जिस प्रकार मार्ग में थके हुए पथिक को चोर बाधा पहुंचाते हैं, उसी प्रकार के दुष्टबुद्धि हिंसक तुम्हारी कृपा से हमारे समीप न रहें. (७) सूक्त—१३२        देवता—इंद्र त्वया वयं मघवन्पूर्व्ये धन इन्द्रत्वोताः सासह्वाम पृतन्यतो वनुयाम वनुष्यतः. नेदिष्ठे अस्मिन्नहन्यधि वोचा नु सुन्वते. अस्मिन्यज्ञे वि चयेमा भरे कृतं वाजायन्तो भरे कृतम्.. (१) हे सुखस्वामी इंद्र! यदि तुम हमारी रक्षा करोगे तो हम प्रबल सेना वाले शत्रुओं को भी हरा देंगे. जो शत्रु हमें मारने के लिए तत्पर होंगे, उन पर हम प्रहार करेंगे. पूर्वोक्त धनों से युक्त इस निकटवर्ती यह में हवि देने वाले यजमान से बार-बार कहो, युद्धों में विजय पाने वाले तुम्हारे उद्देश्य से हम हवि रूप अन्न लाते हैं. (१) स्वर्जषे भर आप्रस्य वक्मन्युषर्बुधः स्वस्मिन्नञ्जसि क्राणस्य स्वस्मिन्नञ्जसि. अहन्त्रिन्द्रो यथा विदे शीर्ष्णाशीर्ष्णोपवाच्यः. अस्मत्रा ते सध्रयक् सन्तु रातयो भद्रा भद्रस्य रातयः.. (२) जो वीर पुरुष युद्ध में मारे जाते हैं, उन्हें इंद्र स्वर्ग देते हैं. युद्ध स्वर्ग प्राप्ति का निष्कपट मार्ग है. इंद्र ऐसे युद्ध के आगे रहते हैं एवं जो यज्ञकर्त्ता प्रातःकाल जागते हैं, उनके शत्रुओं का ebook converter DEMO Watermarks*