ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 435, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंतेन यज्ञेन स्वरङ्कृतेन स्विष्टेन वक्षणा आ पृणध्वम्.. (५) होता, अध्वर्यु, आवया, अग्निमिध, ग्रावाग्राम, शंस्ता एवं सुविप्र उस प्रसिद्ध एवं भली- भांति अलंकृत यज्ञ द्वारा नदियों को जल से भरें. (५) यूपव्रस्का उत ये यूपवाहाश्चषालं ये अश्वयूपाय तक्षति. ये चार्वते पचनं सम्भरन्त्युतो तेषामभिगूर्तिर्न इन्वतु.. (६) जो लोग यूप के लिए उपयोगी पेड़ काटने वाले हैं, जो यूप के निमित्त कटे हुए पेड़ को ढोने वाले हैं, जो अश्व बांधने वाले यूप में चषाल अर्थात् बांधने योग्य सिरा बनाते हैं अथवा जो घोड़े का मांस पकाने के लिए लकड़ी के बरतन तैयार करते हैं, इन सबमें मेरा संकल्प समा जाए. (६) उप प्रागात्सुसन्मेऽधायि मन्म देवानामाशा उप वीतपृष्ठः. अन्वेनं विप्रा ऋषयो मदन्ति देवानां पुष्टे चकृमा सुबन्धुम्.. (७) हमें उत्तम फल प्राप्त हो. सुडौल पीठ वाला घोड़ा यज्ञफल के रूप में देवों की आशापूर्ति हेतु आवे. हम उसे बांधेंगे. इसे देखकर मेधावी ऋत्विज् तुष्ट हों. (७) य द्वाजिनो दाम सन्दानमर्वतो या शीर्षण्या रशना रज्जुरस्य. यद्वा घास्य प्रभृतमास्ये३ तृणं सर्वा ता ते अपि देवेष्वस्तु.. (८) घोड़े की गरदन में बांधी जाने वाली, पैरों में बांधी जाने वाली एवं लगाम के रूप में मुख में डाली जाने वाली रस्सी— ये सब रस्सियां एवं उसके मुंह में पड़ने वाली घास देवों को प्राप्त हो. (८) यदश्वस्य क्रविषो मक्षिकाश यद्वा स्वरौ स्वधितौ रिप्तमस्ति. यद्धस्तयोः शमितुर्यन्नखेषु सर्वा ता ते अपि देवेष्वस्तु.. (९) घोड़े का जो कच्चा मांस मक्खियां खाती हैं, जो उसे काटते समय छुरी में लगा रह जाता है, अथवा काटने वाले के हाथों में लगा रह जाता है, वह भी देवों को प्राप्त हो. (९) यदूवध्यमुदरस्यापवाति य आमस्य क्रविषो गन्धो अस्ति. सुकृता तच्छमितारः कृण्वन्तूत मेधं शृतपाकं पचन्तु.. (१०) घोड़े के पेट में जो बिना पची हुई घास रह जाती है एवं पकाते समय जो कच्चे मांस का अंश बच रहता है, उसे मांस काटने वाले शुद्ध करें एवं यज्ञ के योग्य मांस देवों के निमित्त पकावें. (१०) यत्ते गात्रादग्निना पच्यमानादभि शूलं निहतस्यावधावति. ebook converter DEMO Watermarks*