ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 440, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंयह युद्ध में कुशल घोड़ा मन से देवों का चिंतन करता हुआ बंधन के स्थान को ले जाया जा रहा है. घोड़े का मित्र बकरा उसके आगे-आगे चल रहा है. मंत्र को बोलते हुए ऋत्विज् पीछे-पीछे चलते हैं. (१२) उप प्रागात्परमं यत्सधस्थमर्वां अच्छा पितरं मातरं च. अद्या देवाञ्जुष्टतमो हि गम्या अथा शास्ते दाशुषे वार्याणि.. (१३) चलने में कुशल घोड़ा अपनी माता और पिता के समीप पहुंचने के लिए ऐसे स्वर्गीय स्थान पर जाता है, जहां सब लोग एक साथ रह सकें. हे अश्व! आज तुम परम प्रसन्न होकर देवों के समीप आओ, तुम्हारे जाने से हव्यदाता यजमान उत्तम धन प्राप्त करेगा. (१३) सूक्त—१६४ देवता—विश्वेदेव आदि अस्य वामस्य पलितस्य होतुस्तस्य भ्राता मध्यमो अस्त्यश्न:. तृतीयो भ्राता घृतपृष्ठो अस्यात्रापश्यं विश्र्पतिं सप्तपुत्रम्.. (१) आरोग्य प्राप्ति के लिए सबके द्वारा सेवनीय व जगत्पालक सूर्य के बीच वाले भाई वायु हैं. इसके तीसरे भाई आहुति स्वीकार करने वाले अग्नि हैं. इन भाइयों के बीच में किरणरूपी सात पुत्रों सहित विश्वपति दिखाई देते हैं. (१) सप्त युञ्जन्ति रथमेकचक्रमेको अश्वो वहति सप्तनामा. त्रिनाभि चक्रमजरमनर्वं यत्रेमा विश्वा भुवनाधि तस्थु:.. (२) सूर्य के एक पहिए वाले रथ में जुते हुए सात घोड़े ही उसको खींचते हैं. सात नामों वाला एक ही घोड़ा रथ को खींचता है. दृढ़ और नित्य नवीन तीन नाभियां उस पहिए में हैं. उस में सारा विश्व स्थित है. (२) इमं रथमधि ये सप्त तस्थुः सप्तचक्रं सप्त वहन्त्यश्वाः. सप्त स्वसारो अभि सं नवन्ते यत्र गवां निहिता सप्त नाम.. (३) सात पहियों वाले रथ में जुते हुए सात घोड़े ही उसको खींचते हैं. सात किरण रूपी बहिनें इसके सामने चलती हैं एवं सात गाएं इस रथ में बैठी हैं. (३) को ददर्श प्रथमं जायमानमस्थन्वन्तं यदनस्था बिभर्ति. भूम्या असुरसृगात्मा क्व स्वित्को विद्वांसमुप ग्रात्प्रष्टुमेतत्.. (४) जब अस्थिहीन प्रकृति ने अस्थि वाले संसार को धारण किया था, तब प्रथम उत्पन्न होने वाले को कौन देख सका था? प्राण और रक्त ने तो पृथ्वी से जन्म लिया, पर आत्मा कहां से आई? यह प्रश्न किसी जानकार से पूछने कौन जाएगा. (४) ebook converter DEMO Watermarks*