ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 549, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्वादत्तेभी रुद्र शन्तमेभिः शतं हिमा अशीय भेषजेभिः. व्य१स्मद्द्वेषो वितरं व्यंहो व्यमीवाश्चातयस्वा विषूचीः.. (२) हे रुद्र! हम तुम्हारी दी हुई सुखकारी ओषधियों की सहायता से सौ वर्ष तक जीवित रहें. हमारे शत्रुओं का विनाश करो, हमारे पाप को दूर करो एवं हमारे शरीर में फैली बीमारियों को मिटाओ. (२) श्रेष्ठो जातस्य रुद्र श्रियासि तवस्तमस्तवसां वज्रबाहो. पर्षि णः पारमंहसः स्वस्ति विश्वा अभीती रपसो युयोधि.. (३) हे रुद्र! तुम ऐश्वर्य से सब प्राणियों की अपेक्षा श्रेष्ठ हो. हे वज्रबाहु! तुम बढ़े हुए लोगों में अतिशय उन्नत हो. हमें कुशलता के साथ पाप के उस पार ले जाओ एवं सभी पापों को हमसे दूर ले जाओ. (३) मा त्वा रुद्र चुक्रुधामा नमोभिर्मा दुष्टुती वृषभ मा सहूती. उन्नो वीराँ अर्पय भेषजेभिर्भिषक्तमं त्वा भिषजां शृणोमि.. (४) हे अभिलाषापूरक रुद्रो! हम विधिविरुद्ध नमस्कारों, अशोभन स्तुतियों एवं अन्य देवों के साथ आह्वान द्वारा तुम्हें क्रोधित न करें. हमारे पुत्रों को अपनी ओषधियों द्वारा उत्तम बनाओ. हमने सुना है कि तुम वैद्यों में सबसे श्रेष्ठ हो. (४) हवीमभिर्हवते यो हविर्भिरेव स्तोमेभी रुद्रं दिषीय. ऋदूदरः सुहवो मा नो अस्यै बभ्रुः सुशिप्रो रीरधन्मनायै.. (५) जो रुद्र हव्य के साथ-साथ आह्वानाें से बुलाए जाते हैं, उनका क्रोध मैं स्तोत्रों द्वारा मिटा दूंगा. कोमल उदर वाले, शोभन आह्वान से युक्त, पीले रंग वाले एवं सुंदर नाक वाले रुद्र मेरे प्रति हिंसा बुद्धि न रखें. (५) उन्मा ममन्द वृषभो मरुत्वान्त्वक्षीयसा वयसा नाधमानम्. घृणीव च्छायामरपा अशीया विवासेयं रुद्रस्य सुम्नम्.. (६) मैं कामवर्षक एवं मरुतों से युक्त रुद्र से प्रार्थना करता हूं कि वे मुझे उत्तम अन्न से तृप्त करें. धूप से व्याकुल व्यक्ति जिस प्रकार छाया में प्रवेश करता है, उसी प्रकार पापरहित होकर रुद्र द्वारा दिए हुए सुख को भोगने के लिए मैं उनकी सेवा करूंगा. (६) क्व१स्य ते रुद्र मृळयाकुर्हस्तो यो अस्ति भेषजो जलाषः. अपभर्ता रपसो दैव्यस्याभी नु मा वृषभ चक्षमथाः.. (७) हे रुद्र! तुम्हारा वह सुखदाता हाथ कहां है, जो सबको सुख पहुंचाने वाली दवाएं बनाता है? हे कामवर्षक रुद्र! तुम देवकृत पाप का विनाश करते हुए मुझे जल्दी क्षमा करो. (७) ebook converter DEMO Watermarks*