भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 585, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 585

सूक्त—८ देवता—यूप अञ्जन्ति त्वामध्वरे देवयन्तो वनस्पते मधुना दैव्येन. यदूर्ध्वस्तिष्ठा द्रविणेह धत्ताद्यद्वा क्षयो मातुरस्या उपस्थे.. (१) हे वनस्पति निर्मित यूप! यज्ञ में देवों की अभिलाषा करते हुए अध्वर्यु आदि देव संबंधी घी से तुम्हें भिगोते हैं. तुम चाहे ऊंचे खड़े रहो अथवा इस धरती माता की गोद में निवास करो, पर तुम हमें धन प्रदान करो. (१) समिद्धस्य श्रयमाणः पुरस्ताद्ब्रह्म वन्वानो अजरं सुवीरम्. आरे अस्मदमतिं बाधमान उच्छ्रयस्व महते सौभगाय.. (२) हे यूप! तुम प्रज्वलित आहवानीय नामक अग्नि से पूर्व दिशा में रहते हुए जरारहित, समृद्ध एवं शोभन संतानयुक्त अन्न देते हुए तथा हमारे शत्रुभूत पाप को दूर भगाते हुए, हमें विशाल संपत्ति देने के लिए ऊंचे बनो. (२) उच्छ्रयस्व वनस्पते वर्ष्मन्पृथिव्या अधि. सुमिती मीयमानो वर्चो धा यज्ञवाहसे.. (३) हे वनस्पतिरूप यूप! तुम धरती के उत्तम स्थान यज्ञमंडप में ऊंचे खड़े होओ. तुम सुंदर परिमाण से नापे गए हो. तुम मुझ यज्ञकर्त्ता को अन्न दो. (३) युवा सुवासाः परिवीत आगात्स उ श्रेयान्भवति जायमानः. तं धीरासः कवय उन्नयन्ति स्वाध्यो३ मनसा देवयन्तः.. (४) दृढ़ अंग वाला, शोभन वस्त्र से युक्त एवं ढका हुआ यूप आता है. वही सब वनस्पतियों की अपेक्षा उत्तम रूप से उत्पन्न हुआ है. बुद्धिमान्, शोभन-ध्यान वाले एवं क्रांतदर्शी अध्वर्यु आदि मन से देवों की कामना करते हुए उसे ऊंचा उठाते हैं. (४) जातो जायते सुदिनत्वे अह्नां समर्य आ विदथे वर्धमानः. पुनन्ति धीरा अपसो मनीषा देवया विप्र उदियर्ति वाचम्.. (५) धरती पर पेड़ के रूप में उत्पन्न यूप मनुष्यों से युक्त यज्ञ में घी आदि से सब प्रकार शोभित होकर दिनों को उत्तम बनाता है. यज्ञकर्म करने वाले मेधावी अध्वर्यु आदि अपनी बुद्धि के अनुसार उसे जल से धोकर शुद्ध करते हैं. देवों को द्रव्य देने वाले मेधावी होता यूप की स्तुति बोलते हैं. (५) यान्वो नरो देवयन्तो निमिम्युर्वनस्पते स्वधितिर्वा ततक्ष. ते देवासः स्वरवस्तस्थिवांसः प्रजावदस्मे दिधिषन्तु रत्नम्.. (६) हे यूपसमूह! देवों की अभिलाषा करने वाले एवं यज्ञकर्म के संपादक अध्वर्यु आदि ने ebook converter DEMO Watermarks*