भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 599, कुल 1855 में से

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योग्य देवों को यहां बुलाओ, क्योंकि तुम देवों का तेज धारण करते हो. (४) यत्त्वा होतारमनजन्मिषेधे निषादयन्तो यजथाय देवाः. स त्वं नो अग्नेऽवितेह बोध्यधि श्रवांसि धेहि नस्तनूषु.. (५) हे अग्नि! यज्ञकर्म करने के लिए बैठे हुए तेजस्वी ऋत्विज् यज्ञ में तुम्हें होता नाम देकर घी की आहुति से सींचते हैं. अतः तुम हमारी रक्षा के निमित्त आओ एवं हमारी संतान को अन्न दो. (५) सूक्त—२० देवता—अग्नि अग्निमुषमश्विना दधिक्रां व्युष्टिषु हवते वह्निरुक्थैः. सुज्योतिषो नः शृण्वन्तु देवाः सजोषसो अध्वरं वावशनाः.. (१) हव्य वहन करने वाले अग्नि उषा को अधिकाररहित करते समय उषा, अश्विनीकुमार एवं दधिक्रा को सूक्तों के द्वारा बुलाते हैं. शोभन बुद्धि वाले एवं परस्पर संगत देवगण हमारे यज्ञ की कामना करते हुए उस आह्वान को सुनें. (१) अग्ने त्री ते वाजिना त्री षधस्था तिस्रस्ते जिह्वा ऋतजात पूर्वीः. तिस्र उ ते तन्वो देववातास्ताभिर्नः पाहि गिरो अप्रयुच्छन्.. (२) हे यज्ञों में उत्पन्न अग्नि! तुम्हारे अन्नस्थान एवं देवों का उदर पूर्ण करने वाली जिह्वाएं तीन हैं. तुम सावधान होकर देवों द्वारा अभिलषित तीन शरीरों के द्वारा हमारे स्तोत्रों की रक्षा करो. (२) अग्ने भूरीणि तव जातवेदो देव स्वधावोऽमृतस्य नाम. याश्च माया मायिनां विश्वमिन्व त्वे पूर्वीः सन्दधुः पृष्टबन्धो.. (३) हे द्योतमान, जातवेद, अन्न स्वामी एवं मरणरहित अग्नि! देवों ने तुम्हें बहुत से नाम दिए हैं. हे विश्वतृप्तिकारक एवं वांछित फल देने वाले अग्नि! देवों ने मायावियों की जो बहुत सी मायाएं तुम में धारण की थीं, वे तुममें हैं. (३) अग्निर्नेता भग इव क्षितीनां दैवीनां देव ऋतुपा ऋतावा. स वृत्रहा सनयो विश्ववेदाः पर्षद्विश्वाति दुरिता गृणन्तम्.. (४) ऋतुओं के पालक सूर्य के समान जो अग्नि मानवों और देवों के नियामक, सत्यकर्मा, वृत्रनाशक, सनातन, सर्वज्ञाता एवं तेजस्वी हैं, वे स्तुतिकर्त्ता के सारे पापों का अतिक्रमण करके पार लगावें. (४) दधिक्रामग्निमुषसं च देवीं बृहस्पतिं सवितारं च देवम्. ebook converter DEMO Watermarks*