ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 603, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंअग्न इळा समिध्यसे वीतिहोत्रा अमर्त्यः. जुषस्व सू नो अध्वरम्.. (२) हे यज्ञ को प्रेम करने वाले तथा मरणरहित अग्नि! तुम्हें उत्तर वेदी पर जलाया जाता है. तुम हमारे यज्ञ की भली प्रकार सेवा करो. (२) अग्ने द्युम्नेन जागृवे सहसः सूनवाहुत. इदं बर्हिः सदो मम.. (३) हे स्वतेज से जागृत एवं बल के पुत्र अग्नि! मेरे द्वारा बुलाए हुए तुम मेरे द्वारा बिछाए हुए कुशों पर बैठो. (३) अग्ने विश्वेभिरग्निभिर्देवेभिर्महया गिरः. यज्ञेषु य उ चायवः.. (४) हे अग्नि! अपने पूजकों के यज्ञों में समस्त तेजस्वी अग्नियों के साथ स्तुति वचनों का आदर करो. (४) अग्ने दा दाशुषे रयिं वीरवन्तं परीणसम्. शिशीहि न सूनुमतः.. (५) हे अग्नि! हव्यदाता यजमान को संतानयुक्त पर्याप्त धन दो तथा हम संतान वालों की उन्नति करो. (५) सूक्त—२५ देवता—अग्नि अग्ने दिवः सूनुरसि प्रचेतास्तना पृथिव्या उत विश्ववेदाः. ऋधग्देवाँ इह यजा चिकित्वः.. (१) हे सर्वविषयज्ञाता तथा यज्ञकर्म के ज्ञान से युक्त अग्नि! तुम आकाश तथा धरती के पुत्र हो. हे चेतनाशील अग्नि! तुम इस यज्ञ में अलग-अलग हवि देकर देवों का आदर करो. (१) अग्निः सनोति वीर्याणि विद्वानत्सनोति वाजममृताय भूषण्. स नो देवाँ एह वहा पुरुक्षो.. (२) अग्नि स्वयं को विभूषित करके यजमान को सामर्थ्य तथा देवों को अन्न देते हैं. हे बहुविध अन्नयुक्त अग्नि! हमारे कल्याण के निमित्त देवों को इस यज्ञ में लाओ. (२) अग्निद्यावापृथिवी विश्वजन्ये आ भाति देवी अमृते अमूरः. क्षयन्वाजैः पुरुश्चन्द्रो नमोभिः.. (३) सर्वज्ञ, समस्त विश्व के स्वामी, अमित प्रकाशयुक्त, बल एवं अन्नसहित अग्नि संसार को जन्म देने वाले, द्योतमान और मरणरहित धरती-आकाश को प्रकाशित करते हैं. (३) अग्न इन्द्रश्च दाशुषो दुरोणे सुतावते यज्ञमिहोप यातम्. ebook converter DEMO Watermarks*