ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 625, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंइन्द्रो वृत्रमवृणोच्छर्धनीतिः प्र मायिनाममिनाद्रूपणीतिः. अहन्व्यंसमुशधग्वनेष्वाविर्धेना अकृणोद्राम्याणाम्.. (३) प्रसिद्धकर्म वाले इंद्र ने वृत्र असुर को रोका था. युद्ध में शत्रुओं के प्रहार रोकने वाले इंद्र ने मायावियों को विशेष रूप से मारा था. शत्रुवध की अभिलाषा करने वाले इंद्र ने वन में छिपे हुए एवं बिना धड़ वाले शत्रु का वध किया तथा रात्रियों में छिपी हुई गायों को प्रकट किया. (३) इन्द्रः स्वर्षा जनयन्नहानि जिगयोशिग्भिः पृतना अभिष्टिः. प्रारोचयन्मनवे केतुमह्नामविन्दज्ज्योतिर्बृहते रणाय.. (४) इंद्र ने स्वर्ग देने वाले, अपने तेजों से दिनों को उत्पन्न करते हुए एवं शत्रुओं के साथ युद्ध की कामना करने वाले अंगिराओं का साथ देकर शत्रु सेना को जीत लिया एवं दिन के झंडे के समान सूर्य को मनुष्यों के लिए उद्दीप्त किया. इसके बाद इंद्र ने महान् युद्ध के लिए प्रकाश पाया. (४) इन्द्रस्तुजो बर्हणा आ विवेश नृवद्दधानो नर्या पुरूणि. अचेतयद्दिय इमा जरित्रे प्रेमं वर्णमतिरच्छुक्रमासाम्.. (५) इंद्र ने युद्ध करने वालों के पर्याप्त धनों को छीनते हुए बाधा पहुंचाने वाली तथा युद्ध की अभिलाषा से आगे बढ़ती हुई शत्रु सेनाओं में प्रवेश किया. इंद्र ने स्तुतिकर्त्ता के लिए उषाओं का ज्ञान कराया तथा उनके चमकीले रंग को बढ़ाया. (५) महो महानि पनयन्त्यस्येन्द्रस्य कर्म सुकृता पुरूणि. वृजनेन वृजिनान्तसं पिपेष मायाभिर्दस्यूँरभिभूत्योजाः.. (६) लोग महान् इंद्र के महान् एवं बहुत से उत्तम कर्मों की स्तुति करते हैं. शत्रु परभवकारी एवं ओज वाले इंद्र ने शक्तिशाली लोगों को शक्ति द्वारा एवं दस्युओं को मायाओं द्वारा पीस डाला था. (६) युधेन्द्रो मह्ना वरिवश्चकार देवेभ्यः सत्पतिश्चर्षणिप्राः. विवस्वतः सदने अस्य तानि विप्रा उक्थेभिः कवयो गृणन्ति.. (७) देवों के स्वामी एवं मानवों के कामपूरक इंद्र ने महान् युद्ध के द्वारा धन प्राप्त करके स्तोताओं को दिया. मेधावी स्तोतागण यजमान के घर में मंत्रों द्वारा उन कर्मों की प्रशंसा करते हैं. (७) सत्रासाहं वरेण्यं सहोदां ससवांसं स्वरपश्व देवीः. ससान यः पृथिवीं द्यामुतेमामिन्द्रं मदन्त्यनु धीरणासः.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*