ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 630, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे इंद्र! हमें जल्दी से धन दो. तुम्हें धन देने से कौन रोक सकता है? हम जानते हैं कि तुम उत्तम धनों के स्वामी हो. हे हरि नामक घोड़ों वाले इंद्र! तुम्हारे पास जो महान् धन है, वह हमें दो. (९) अस्मे प्र यन्धि मघवन्नृजीषिन्निन्द्र रायो विश्ववारस्य भूरेः. अस्मे शतं शरदो जीवसे धा अस्मे वीराञ्छश्वत इन्द्र शिप्रिन्.. (१०) हे मघवा एवं ऋजीषी इंद्र! हमें वरणयोग्य बहुत सा धन दो एवं जीने के लिए सौ वर्ष का समय प्रदान करो. हे सुंदर ठोड़ी वाले इंद्र! हमें बहुत से वीर पुत्र दो. (१०) शुनं हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ. शृण्वन्तमुग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि सञ्जितं धनानाम्.. (११) धनप्राप्ति वाले संग्राम में उत्साहपूर्ण, धनवान्, सकल विश्व के नेता, स्तुतियां सुनने वाले शत्रुओं के लिए भयंकर, युद्ध में राक्षसविनाशकारी एवं शत्रुओं के धन के विजेता इंद्र को हम रक्षा के लिए बुलाते हैं. (११) सूक्त—३७ देवता—इंद्र वार्त्रहत्याय शवसे पृतनाषाह्वाय च. इन्द्र त्वा वर्तयामसि.. (१) हे इंद्र! हम वृत्र को नष्ट करने वाला बल पाने तथा शत्रु सेना को हराने के लिए तुम्हें प्रेरित करते हैं. (१) अर्वाचीनं सु ते मन उत चक्षुः शतक्रतो. इन्द्र कृण्वन्तु वाघतः.. (२) हे शतक्रतु इंद्र! स्तोता जन तुम्हारे मन एवं आंखों को प्रसन्न करके मेरे अनुकूल बनावें. (२) नामानि ते शतक्रतो विश्वाभिर्गीर्भीरीमहे. इन्द्राभिमातिषाह्ये.. (३) हे शतक्रतु इंद्र! युद्ध उपस्थित होने पर हम समस्त स्तुतियों द्वारा तुम्हारे नामों के अनुकूल बल की याचना करते हैं. (३) पुरुष्टुतस्य धामभिः शतेन महयामसि. इन्द्राय चर्षणीधृतः.. (४) अनेक लोगों की स्तुति के पात्र, असीम तेज से युक्त एवं मनुष्यों के धारणकर्त्ता इंद्र की हम स्तुति करते हैं. (४) इन्द्रं वृत्राय हन्तवे पुरुहूतमुप ब्रुवे. भरेषु वाजसातये.. (५) ebook converter DEMO Watermarks*