भारतकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 636, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 636

यजमान का द्युतियुक्त व क्षयरहित सोमादि हवि चारों ओर से इंद्र को प्राप्त है. इंद्र सोम को पीकर बढ़ते हैं. (७) अर्वावतो न आ गहि परावतश्च वृत्रहन्. इमा जुषस्व नो गिर:.. (८) हे वृत्रनाशक इंद्र! समीपवर्ती अथवा दूरवर्ती स्थान से हमारे सामने आओ और इन स्तुतियों को स्वीकार करो. (८) यदन्तरा परावतमर्वावतं च हूयसे. इन्द्रेह तत आ गहि.. (९) हे इंद्र! तुम दूरवर्ती, निकटवर्ती अथवा मध्यवर्ती स्थान से बुलाए जाते हो. सोमपान के लिए वहां से इस यज्ञ में आओ. (९) सूक्त—४१ देवता—इंद्र आ तू न इन्द्र मद्र्यग्घुवान: सोमपीतये. हरिभ्यां याह्यद्रिव:.. (१) हे वज्रधारी इंद्र! होताओं द्वारा बुलाए हुए तुम हरि नामक घोड़ों की सहायता से सोम पीने के लिए मेरे यज्ञ में मेरे सामने जल्दी आओ. (१) सत्तो होता न ऋत्वियस्तिस्तिरे बर्हिरानुषक्. अयुजन्प्रातरद्रय:.. (२) हे इंद्र! हमारे यज्ञ में तुम्हें बुलाने के लिए होता ठीक समय पर बैठ चुका है. कुशों को एक-दूसरे से मिलाकर बिछाया गया है एवं प्रातःसवन में सोम निचोड़ने के लिए पत्थर एक- दूसरे से मिल गए हैं. (२) इमा ब्रह्म ब्रह्मवाह: क्रियन्त आ बर्हि: सीद. वीहि शूर पुरोळाशम्.. (३) हे स्तुतियों द्वारा मिलने वाले इंद्र! तुम्हारे लिए ये स्तुतियां की जा रही हैं. तुम इन कुशाओं पर भली प्रकार बैठो. हे शूर! इस पुरोडाश को खाओ. (३) रारन्धि सवनेषु ण एषु स्तोमेषु वृत्रहन्. उक्थेष्विन्द्र गिर्वण:.. (४) हे स्तुतियों द्वारा प्रशंसनीय एवं वृत्रहंता इंद्र! हमारे द्वारा बोले गए तीनों स्तोत्रों एवं उक्थों में रमण करो. (४) मतय: सोमपामुरुं रिहन्ति शवसस्पतिम्. इन्द्रं वत्सं न मातर:.. (५) हे महान्, सोमपानकर्त्ता एवं शक्ति के स्वामी इंद्र! जिस प्रकार गाएं बछड़ों को चाटती हैं, उसी प्रकार हमारी स्तुतियां तुम्हें चाटती हैं. (५) ebook converter DEMO Watermarks*