ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 644, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंतं ते माता परि योषा जनित्री महः पितुर्दर्म आसिञ्चदग्रे.. (२) हे इंद्र! जिस दिन तुमने जन्म लिया, उसी दिन तुमने प्यास लगने पर पर्वतों पर उत्पन्न होने वाली सोमलता का ताजा रस पिया था. तुम्हारे महान् पिता के घर में तुम्हें जन्म देने वाली युवती माता ने दूध पिलाने से पहले तुम्हें सोमरस पिलाया था. (२) उपस्थाय मातरमन्नमैट्ट तिग्ममपश्यदभि सोममूहः. प्रयावयन्नचरद् गृत्सो अन्यान्महानि चक्रे पुरुधप्रतीकः.. (३) इंद्र ने माता के समीप जाकर अन्न मांगा. इंद्र ने माता के स्तनों में दूध के रूप में वर्तमान तेजस्वी सोम को देखा. इंद्र शत्रुओं को अपने-अपने स्थानों से गिराते हुए घूमने लगे एवं अनेक प्रकार से अंग संचालन करके वृत्रहनन आदि महान् कर्म किए. (३) उग्रस्तुराषाळभिभूत्योजा यथावशं तन्वं चक्र एषः. त्वष्टारमिन्द्रो जनुषाभिभूयामुष्या सोममपिबच्चमूषु.. (४) शत्रुओं को भयप्रद, शीघ्रतापूर्वक शत्रुओं को हराने वाले एवं शत्रुओं को हराने वाले पराक्रम से युक्त इंद्र ने अपने शरीर को इच्छानुसार विविध प्रकार का बनाया, अपनी शक्ति से त्वष्टा नामक असुर को हराया एवं चमसों में रखे हुए सोम को चुरा कर पिया. (४) शुनं हुवेम मघवानमिन्द्रमस्मिन्भरे नृतमं वाजसातौ. शृण्वन्तमुग्रमूतये समत्सु घ्नन्तं वृत्राणि सञ्जितं धनानाम्.. (५) धन-प्राप्ति वाले संग्राम में उत्साहपूर्ण, धनवान्, सकल विश्व के नेता, स्तुतियां सुनने वाले, शत्रुओं को भयंकर, युद्ध में राक्षसविनाशकारी एवं शत्रुओं के धन के विजेता इंद्र को हम रक्षा के लिए बुलाते हैं. (५) सूक्त—४९ देवता—इंद्र शंसा महामिन्द्रं यस्मिन्विश्वा आ कृष्टयः सोमपाः काममव्यन्. यं सुक्रतुं धिषणे विभ्वतष्टं घनं वृत्राणां जनयन्त देवाः.. (१) हे होता! महान् इंद्र की स्तुति करो. उनकी रक्षा पाकर सभी मनुष्य यज्ञों में सोम पीकर मनोवांछित फल पाते हैं. धरती, आकाश एवं समस्त देवों ने शोभन कर्म एवं पापनाशक इंद्र को जन्म दिया. ब्रह्मा ने इंद्र को संसार का अधिपति बनाया. (१) यं नु नकिः पृतनासु स्वराजं द्विता तरति नृतमं हरिष्ठाम्. इनतमः सत्वभिर्यो ह शूषैः पृथुज्रया अमिनादायुरद्स्योः.. (२) युद्ध में अपने तेज से सुशोभित, हरि नामक घोड़ों वाले रथ में बैठे हुए, सर्वोत्तम नेता